बिहार की राजनीति में सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन ने नया तूफान खड़ा कर दिया है। सम्राट कैबिनेट के विस्तार के बाद जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेज ने प्रशासनिक हलकों और सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या बिहार में उपमुख्यमंत्री का पद खत्म हो गया है?
उपमुख्यमंत्री पद खत्म
यह चर्चा तब शुरू हुई जब नई कैबिनेट लिस्ट में विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव के नाम के आगे उपमुख्यमंत्री नहीं लिखा गया था। सरकारी दस्तावेज बता रहे हैं कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री और बाकी 34 मंत्री हैं। डिप्टी CM का दर्जा किसी के पास नहीं है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या BJP की सरकार ने JDU के दोनों उप मुख्यमंत्री से उनका पद छीन लिया है। दरअसल, 7 मई को सम्राट कैबिनेट का विस्तार हुआ था और मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की जारी अधिसूचना में CM के साथ मंत्रियों के विभाग तो बताए गए, लेकिन विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के आगे “उप मुख्यमंत्री” नहीं लिखा गया।

सरकार की सफाई
मामले को तूल पकड़ता देख राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को आगे आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। कैबिनेट सचिवालय विभाग के सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य में उपमुख्यमंत्री का पद खत्म नहीं किया गया है और यह पूरी तरह से बरकरार है। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से हर अधिसूचना में बार-बार पदनाम का उल्लेख करना जरूरी नहीं होता है। विभागों के बंटवारे वाली लिस्ट में मुख्य ध्यान मंत्रियों को आवंटित कामों पर होता है।
नीतीश से मिलने पहुंचे मंत्री
इधर, रविवार सुबह JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, सीनियर लीडर ललन सिंह, लेसी सिंह और अशोक चौधरी नीतीश कुमार से मिलने 7 सर्कुलर रोड पहुंचे। जहां मंत्रियों के कामकाज को लेकर बात हुई।