उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में अधिवक्ताओं के लिए तीन बड़े फैसलों की घोषणा की है। इनमें इलाहाबाद हाईकोर्ट में करीब 10 हजार वकीलों के लिए मल्टीलेवल पार्किंग, 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट और प्रदेश के सभी वकीलों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस देने की घोषणा शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फैसलों से अधिवक्ताओं को सुविधाएं मिलने के साथ न्यायिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
न्याय को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता बंधु समाज के ओपिनियन को बनाते हैं, जन विश्वास के प्रतीक माने जाते हैं।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 14, 2026
जनपद प्रयागराज में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन कार्यकारिणी 2025-26 द्वारा आज आयोजित सम्मान समारोह में सम्मिलित हुआ। इस अवसर पर मा. उच्च… pic.twitter.com/G0X05RA1d4
10 हजार वकीलों के लिए मल्टीलेवल पार्किंग
सीएम योगी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में करीब 10 हजार वकीलों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मल्टीलेवल पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। इससे हाईकोर्ट परिसर और आसपास पार्किंग से जुड़ी समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
400 राज्य विधि अधिकारियों को मिलेंगे टैबलेट
सरकार की ओर से 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य राज्य विधि अधिकारियों को तकनीक से जोड़ना और उनके काम को अधिक सुविधाजनक एवं तेज बनाना है।
सभी वकीलों को 5 लाख तक कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी अधिवक्ताओं के लिए 5 लाख रुपये तक के कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा देने का ऐलान किया। इस घोषणा को वकीलों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
स्वतंत्रता आंदोलन में वकीलों की भूमिका याद की
प्रयागराज की न्यायिक और ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि इस धरती ने भारत की संवैधानिक चेतना और विधिक विमर्श को महत्वपूर्ण दिशा दी है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अधिवक्ताओं के योगदान को भी याद किया। मुख्यमंत्री ने पंडित मोतीलाल नेहरू और महामना मदन मोहन मालवीय का जिक्र करते हुए कहा कि प्रयागराज ऐसे कई अधिवक्ताओं की कर्मभूमि रहा है, जिन्होंने वकालत के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान को भी याद किया।
'2017 से पहले पुलिस में 45-50 फीसदी पद खाली थे'
सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल संसाधनों की कमी ही चुनौती नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी भी कई समस्याएं थीं। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था की पहली कड़ी पुलिस होती है, लेकिन 2017 से पहले प्रदेश के पुलिस बल में 45 से 50 फीसदी तक पद खाली थे। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। सीएम योगी के मुताबिक, पहले एक समय में प्रदेश में करीब 3 हजार पुलिसकर्मियों को ही प्रशिक्षण देने की क्षमता थी। अब इसे बढ़ाकर 60 हजार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश एक साथ 60 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री ने बार और बेंच को न्याय रूपी रथ के महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि इनके बीच बेहतर तालमेल से न्याय व्यवस्था मजबूत होगी और विधि के शासन के साथ सुशासन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।