उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ यूपी एटीएस और पुलिस की कार्रवाई जारी है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, शहजाद भट्टी और आईएसआई से जुड़े कथित मॉड्यूल की जांच के दौरान अब तक 52 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 60 अन्य संदिग्ध युवकों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसियों को सोशल मीडिया के जरिए चलाए जा रहे कथित नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े कई इनपुट मिलने की बात कही गई है।
12 मुकदमे दर्ज, 175 से पूछताछ
एटीएस और यूपी पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 मुकदमे दर्ज किए हैं। जांच के दौरान करीब 175 संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ में सोशल मीडिया पर बनाए गए अलग-अलग ग्रुप, उनके सदस्यों और संपर्कों से जुड़ी जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां इन डिजिटल कनेक्शनों की पड़ताल कर रही हैं।
शहजाद भट्टी नेटवर्क पर नजर
जांच का एक अहम हिस्सा पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क को लेकर है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े थे और इनके बीच किस तरह संपर्क स्थापित किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि नेटवर्क की गतिविधियों और इसके संभावित संपर्कों की पड़ताल लगातार जारी है।
14 राज्यों तक पहुंची जांच
यह कार्रवाई केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। सरकारी जानकारी के अनुसार, देश के 14 राज्यों में अब तक 250 से ज्यादा संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। विभिन्न राज्यों में हुई कार्रवाई के दौरान आईईडी, ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और निगरानी में इस्तेमाल होने वाले सीसीटीवी कैमरों समेत अन्य सामान बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसियां इन बरामदगी और आरोपों की जांच कर रही हैं।
मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी से सामने आया कनेक्शन
इसी जांच के दौरान यूपी एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने के आरोप में मोहम्मद जफर को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया संपर्कों की भी जांच की। एटीएस के मुताबिक, जफर कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर गाजी बाबा के संपर्क में था। जांच एजेंसी का दावा है कि गाजी बाबा ने उसकी बातचीत जैश-ए-मोहम्मद के एक कमांडर से कराई थी।
कथित फंडिंग की भी जांच
जांच एजेंसियां अब जफर के कथित वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं। एजेंसियों के अनुसार, कुछ रकम क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म बाइनेंस के जरिए ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसियां इन खातों और लेनदेन की जांच कर कथित फंडिंग नेटवर्क की पूरी कड़ी समझने की कोशिश कर रही हैं।
डिजिटल संपर्कों पर भी फोकस
फिलहाल यूपी एटीएस और अन्य जांच एजेंसियों का फोकस नेटवर्क से जुड़े लोगों, उनके सोशल मीडिया संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने पर है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।