भारतीय लोक संस्कृति को अपनी आवाज़ से दुनिया भर में पहचान दिलाने वाली पंडवानी की महान गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके निधन से कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोक कला की अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी विलक्षण प्रतिभा, सशक्त अभिव्यक्ति और आजीवन संगीत साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा ‘पंडवानी’ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी कला ने न केवल देश, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई।
पूरी दुनिया में भारतीय लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई
मुख्यमंत्री योगी ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन कला के प्रति समर्पण, संघर्ष और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रेरणादायी उदाहरण रहेगा। उन्होंने मां दंतेश्वरी से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिवार तथा उनके करोड़ों प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
प्रभावशाली मंचीय शैली से देश-विदेश में अलग पहचान बनाई
24 अप्रैल 1956 को छत्तीसगढ़ के एक साधारण परिवार में जन्मी डॉ. तीजन बाई ने बचपन से ही महाभारत पर आधारित पंडवानी गायन सीखा। उन्होंने उस समय पुरुष प्रधान मानी जाने वाली कापालिक शैली में प्रस्तुति देकर सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी और अपनी दमदार आवाज़ व प्रभावशाली मंचीय शैली से देश-विदेश में अलग पहचान बनाई।
भारतीय लोक परंपरा के प्रति उनका समर्पण हमेशा अमर रहेगा
भारतीय लोक संस्कृति में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्मभूषण और 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया।
डॉ. तीजन बाई भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़, उनकी कला और भारतीय लोक परंपरा के प्रति उनका समर्पण हमेशा अमर रहेगा।