मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक और सुविधाजनक बनाने के लिए नया इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट मॉडल तैयार किया जा रहा है। इस मॉडल के तहत मेट्रो रेल, इलेक्ट्रिक बस और रेंटल साइकिल सेवा को आपस में जोड़ा जाएगा, ताकि यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक निर्बाध और किफायती यात्रा की सुविधा मिल सके। जिला यातायात समिति की बैठक में मिले सुझावों के आधार पर इस योजना को अंतिम रूप दिया गया है।
मेट्रो स्टेशन से बस और साइकिल की सुविधा
योजना के अनुसार, इलेक्ट्रिक बसों के सभी प्रमुख रूट भोपाल मेट्रो की ऑरेंज और ब्लू लाइन के स्टेशनों से जुड़े होंगे। यात्री मेट्रो स्टेशन से उतरकर सीधे इलेक्ट्रिक बस में सफर कर सकेंगे। वहीं, जिन बस स्टॉप पर उनकी यात्रा समाप्त होगी, वहां किराए पर साइकिल उपलब्ध रहेगी। जीपीएस आधारित इस सेवा के जरिए यात्री साइकिल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे और नजदीकी साइकिल स्टैंड पर उसे जमा कर सकेंगे। कॉलोनियों और आवासीय क्षेत्रों में भी साइकिल स्टैंड की संख्या बढ़ाने की योजना है।
मेट्रो नेटवर्क का होगा विस्तार
भोपाल मेट्रो के मास्टर प्लान में लगभग 104 किलोमीटर लंबाई के छह कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। फिलहाल ऑरेंज लाइन पर एम्स से सुभाष नगर तक 6.22 किलोमीटर का संचालन शुरू हो चुका है, जबकि भविष्य में करोंद तक इसका विस्तार किया जाएगा। ब्लू लाइन भदभदा चौराहे से रत्नागिरी तक लगभग 14.16 किलोमीटर लंबी होगी। इसके अलावा रेड, ग्रीन, येलो और ब्राउन लाइन के माध्यम से बैरागढ़, एयरपोर्ट और मंडीदीप जैसे क्षेत्रों को भी मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
विशेषज्ञों ने दी किफायती कनेक्टिविटी की सलाह
यह परियोजना स्मार्ट सिटी कंपनी और भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड की संयुक्त निगरानी में लागू की जाएगी। 25 जुलाई से इलेक्ट्रिक बसों का व्यावसायिक संचालन भी शुरू होने जा रहा है। हालांकि, भोपाल इंटरनेशनल सेंटर के सदस्य राजेंद्र कोठारी का कहना है कि ऐसी योजनाएं तभी सफल होंगी, जब नागरिकों को बेहतर, आसान और किफायती कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए। उनका मानना है कि मेट्रो के साथ मजबूत बस नेटवर्क और अंतिम छोर तक परिवहन सुविधा सुनिश्चित करना इस मॉडल की सफलता की सबसे बड़ी शर्त होगी।