नोटिस के बाद एमपी कांग्रेस में गहराया बवाल, नेताओं ने लगाए भेदभाव और गुटबाजी के गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश कांग्रेस में कलह

नोटिस के बाद एमपी कांग्रेस में गहराया बवाल, नेताओं ने लगाए भेदभाव और गुटबाजी के गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश कांग्रेस में अनुशासनहीनता और गुटबाजी के आरोपों के चलते अंदरूनी कलह गहराई। प्रियंका करार और सुरेश पटेल धाकड़ ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए।

नोटिस के बाद एमपी कांग्रेस में गहराया बवाल नेताओं ने लगाए भेदभाव और गुटबाजी के गंभीर आरोप

भोपाल – मध्य प्रदेश कांग्रेस में अनुशासन और गुटबाजी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सियासी टकराव में बदलता नजर आ रहा है। कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और तेज हो गया है।कांग्रेस महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका करार और किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुरेश पटेल धाकड़ ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए भेदभाव के आरोप लगाए हैं। दोनों नेताओं ने कहा है कि कार्रवाई का पैमाना सभी के लिए समान नहीं है, बल्कि चुनिंदा नेताओं और कार्यकर्ताओं को ही निशाना बनाया जा रहा है।

उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती

नोटिस मिलने के बाद प्रियंका करार ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने खुद को पार्टी का ईमानदार सिपाही बताते हुए कहा कि वह “सौदेबाज नेताओं” के खिलाफ बोलती रहेंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी में सच बोलने वालों को अब नोटिस देकर दबाया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि जब वरिष्ठ नेता आपस में एक-दूसरे पर सार्वजनिक बयानबाजी करते हैं, तब उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।

कोई कदम नहीं उठाया जा रहा

उन्होंने जिला स्तर के एक अध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पार्टी गाइडलाइन के उल्लंघन के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रियंका ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नेता पार्टी में रहकर ही गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं और बाहरी राजनीतिक ताकतों से समझौते कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।

एक बड़ा चुनौतीपूर्ण संकेत माना जा रहा

इसी मुद्दे पर किसान कांग्रेस के नेता सुरेश पटेल धाकड़ ने भी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियम केवल कार्यकर्ताओं पर ही क्यों लागू होते हैं, बड़े नेताओं पर क्यों नहीं।

एक साथ दो प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के बगावती तेवर सामने आने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह और गहराने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे संगठन के लिए एक बड़ा चुनौतीपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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