मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के ढेकी गांव में सरकारी लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। सिंचाई के लिए बनाई गई पक्की नहर पहली ही बारिश में टूट गई, जिससे लाखों लीटर पानी खेतों में भर गया। देखते ही देखते किसानों की खड़ी फसल जलमग्न हो गई और महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनकी उम्मीदें भी इस हादसे के साथ टूट गईं।
घटिया निर्माण के आरोप
ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि नहर निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में घटिया सीमेंट और निम्न स्तर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसकी वजह से करीब 20 फीट लंबा हिस्सा पहली ही बारिश में बह गया। किसानों ने अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
फसलें डूबीं, किसानों का दर्द छलका
नहर टूटने से खेतों में पानी भर गया और बड़ी मात्रा में फसलें खराब हो गईं। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर बीज, खाद और अन्य कृषि कार्य किए थे। उन्हें भरोसा था कि पक्की नहर से सिंचाई की सुविधा मिलेगी और इस बार अच्छी पैदावार होगी, लेकिन अब उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो गई। कई किसानों ने आर्थिक संकट गहराने की भी आशंका जताई है।
अधिकारियों की बेरुखी पर नाराजगी
किसानों का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन घंटों तक कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि समय पर कार्रवाई होती तो नुकसान को कुछ हद तक रोका जा सकता था।
मुआवजे और जांच की मांग
पीड़ित किसानों ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने खराब हुई फसलों का सर्वे कर तत्काल मुआवजा देने की अपील की है। किसानों का कहना है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं आगे भी होती रहेंगी और इसका सबसे बड़ा नुकसान अन्नदाता को ही उठाना पड़ेगा।