रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। 24वें दिन भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रांची के प्रोजेक्ट भवन के पास धरने पर बैठे हैं।राज्य सरकार की ओर से JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों में नाराजगी है, जिनका चयन हो चुका था और कई उम्मीदवार अपने पदों पर काम भी शुरू कर चुके थे। प्रदर्शनकारी अब अपनी नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता और न्याय की मांग कर रहे हैं।
परीक्षा रद्द करने के फैसले का विरोध
JSSC-CGL परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के पास एकत्रित होकर सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसका खामियाजा उन उम्मीदवारों को नहीं भुगतना चाहिए, जिन्होंने मेहनत और नियमों के तहत परीक्षा पास की है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “आप जांच कीजिए, जो गलत है उस पर कार्रवाई कीजिए, लेकिन कुछ लोगों के लिए हमारे साथ ऐसा अन्याय मत कीजिए। प्रदर्शनकारी ने यह भी कहा कि वह जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर अपने सभी दस्तावेज जांच एजेंसियों के सामने पेश कर सकते हैं। उन्होंने मामले की CBI जांच कराने की मांग भी उठाई।
‘सरकार फैसला वापस ले’
प्रदर्शन में शामिल एक अभ्यर्थी ने कहा कि सरकार के फैसले के बाद वह सड़कों पर आने को मजबूर हुआ है। उसने अपने माता-पिता से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि वे इस लड़ाई में फिर जीतेंगे। प्रदर्शनकारी ने सरकार से परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की अपील की। उनका दावा है कि सरकार का फैसला न्यायालय के आदेश की भावना के भी खिलाफ है।
‘हजारों निर्दोषों को मिली सजा’
प्रदर्शनकारी चंदा कुमारी ने कहा कि लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, अगर परीक्षा में कुछ लोगों ने गड़बड़ी की है तो कार्रवाई उन्हीं के खिलाफ होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पूरी परीक्षा रद्द करना सिस्टम को बेहतर बनाने का सही तरीका है? उनके अनुसार, इस फैसले से हजारों ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की। चंदा कुमारी ने आरोप लगाया कि पिछले 24 दिनों से सरकार ने प्रदर्शनकारियों की बात नहीं सुनी है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला, इसलिए अब वे मीडिया के जरिए अपनी मांग सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
नियुक्ति पा चुके उम्मीदवारों की मांग
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा में अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने से उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति हासिल की है। अभ्यर्थियों ने सरकार से परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार, निष्पक्ष जांच और नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट निर्णय की मांग की है। आंदोलन 24वें दिन भी जारी रहने से मामले को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।