नीति आयोग की बैठक में सीएम सुक्खू ने उठाए हिमाचल के वित्तीय मुद्दे, केंद्र से 50...

हिमाचल सीएम सुक्खू की मांगें

नीति आयोग की बैठक में सीएम सुक्खू ने उठाए हिमाचल के वित्तीय मुद्दे, केंद्र से 50,000 करोड़ रुपये की मांग

सीएम सुक्खू ने नीति आयोग की बैठक में हिमाचल की वित्तीय चुनौतियों को उठाया और केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता और उच्च स्तरीय समिति गठन की मांग की।

नीति आयोग की बैठक में सीएम सुक्खू ने उठाए हिमाचल के वित्तीय मुद्दे केंद्र से 50000 करोड़ रुपये की मांग

नीति आयोग की बैठक में सीएम सुक्खू ने उठाए हिमाचल के वित्तीय मुद्दे, केंद्र से 50,000 करोड़ रुपये की मांग | None

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में राज्य के समक्ष खड़ी वित्तीय चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष आर्थिक सहायता देने तथा राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया।

बैठक का विषय ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ था, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक

राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से बढ़ीं मुश्किलें

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) की समाप्ति के कारण हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि केंद्र की ओर से अब तक उपलब्ध कराए गए 25,000 करोड़ रुपये राज्य को हुए नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने विकास कार्यों को गति देने के लिए इस सहायता राशि को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने की मांग की।

सुक्खू ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, जीएसटी व्यवस्था से हुए राजस्व नुकसान और जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में कमी के कारण राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ा है।

पर्यावरणीय सेवाओं का उचित प्रतिफल देने की मांग

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का ‘ग्रीन फ्रंटियर’ है और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि राज्य देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन इसके अनुरूप कोई पर्याप्त आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिलती।

हिमाचल सीएम सुक्खू

उन्होंने केंद्र से राज्य की विशेष भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया।

बिजली, आपदा राहत और जीएसटी नुकसान का मुद्दा उठाया

सुक्खू ने कहा कि लगभग 13,000 मेगावाट बिजली उत्पादन के बावजूद हिमाचल प्रदेश को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से राज्य को करीब 7,000 करोड़ रुपये की बकाया राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल होने के बावजूद हिमाचल को केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि का इंतजार है। वहीं, जीएसटी लागू होने के बाद पिछले आठ वर्षों में राज्य को लगभग 25,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ा है।

शिक्षा और मानव विकास में उपलब्धियों का किया उल्लेख

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हुआ और वर्ष 2026 में स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में छठा स्थान हासिल किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में राज्य इस सूची में 21वें स्थान पर था।

उन्होंने उच्च शिक्षा में राज्य के 43 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। साथ ही राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी हिमाचल के बेहतर प्रदर्शन को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पंप स्टोरेज और बैटरी स्टोरेज जैसी परियोजनाओं के माध्यम से हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान राज्य के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की।

इसके अलावा, उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गगल हवाई अड्डे के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया और हिमाचल को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने का सुझाव रखा।

नशे के खिलाफ अभियान और तकनीकी निगरानी पर बल

सुक्खू ने बच्चों के पोषण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच डेटा साझाकरण को बढ़ावा देने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने की वकालत की।

सीएम सुक्खू

मुख्यमंत्री ने राज्य में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान की जानकारी देते हुए केंद्र सरकार से खुफिया तंत्र को मजबूत करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहयोग का आग्रह किया।

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