दिल्ली की मंडोली जेल में सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा ने गंभीर रूप से बीमार मां से मिलने के लिए मंजूर की गई कस्टडी पेरोल लेने से इनकार कर दिया है। हवारा ने पुलिस सुरक्षा के बीच मां से मिलने जाने के बजाय सामान्य पेरोल देने की मांग की है। अब जेल के शीर्ष अधिकारी उसके अनुरोध पर अंतिम फैसला लेंगे।
3 दिन की कस्टडी पेरोल मंजूर
दिल्ली जेल मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कोर्ट के निर्देश और सुरक्षा समीक्षा के आधार पर हवारा को तीन दिन की कस्टडी पेरोल मंजूर की गई थी। हाई-रिस्क कैदी होने के कारण पेरोल के दौरान उसके साथ सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती जरूरी थी। हालांकि, हवारा ने सुरक्षा घेरे में मां से मिलने जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसके सामान्य पेरोल के अनुरोध पर विचार किया जा रहा है।
CM मान ने मांगी थी 10 दिन की पेरोल
इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर हवारा को 10 दिन की पेरोल देने की सिफारिश की थी। यह मांग मानवीय आधार पर की गई थी। बताया गया कि हवारा की 80 वर्ष से अधिक उम्र की मां गंभीर रूप से बीमार हैं और उनकी हालत नाजुक है। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को भरोसा दिया था कि हवारा को पेरोल मिलने पर पंजाब में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
राज्यपाल की सिफारिश अहम
चूंकि हवारा दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है, इसलिए उसकी पेरोल को लेकर राज्यपाल की सिफारिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री मान की मांग के बाद राज्यपाल ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव से बात करने का भरोसा दिया था।
1995 में हुआ था बेअंत सिंह हत्याकांड
31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ सिविल सचिवालय के बाहर हुए बम धमाके में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में हवारा को 2007 में मौत की सजा सुनाई गई थी। बाद में 2010 में हाई कोर्ट ने उसकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया। हवारा करीब 31 वर्षों से जेल में बंद है और फिलहाल मंडोली जेल में सजा काट रहा है।
सुरक्षा बनाम मानवीय आधार
अब हवारा की पेरोल का मामला सुरक्षा और मानवीय आधार के बीच फंसा हुआ है। एक ओर वह अपनी गंभीर रूप से बीमार मां से मिलना चाहता है, वहीं सुरक्षा एजेंसियां उसे हाई-रिस्क कैदी मानती हैं। ऐसे में जेल प्रशासन को तय करना है कि उसे सुरक्षा के साथ कस्टडी पेरोल दी जाए या उसकी मांग के मुताबिक सामान्य पेरोल पर विचार किया जाए।