हमीरपुर: एझी ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाला, 187 मजदूरों की फर्जी डिमांड

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हमीरपुर: एझी ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाला, 187 मजदूरों की फर्जी डिमांड

हमीरपुर एझी ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाला 187 मजदूरों की फर्जी डिमांड

MGNREGA Scam Hamirpur: हमीरपुर जिले के मुस्करा विकास खंड की एझी ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत चल रहे कार्यों में बड़ा घोटाला सामने आया है। तालाब में पानी भरा होने के बावजूद रिकॉर्ड में 187 मजदूरों की डिमांड दिखाई जा रही है, जो पूरी तरह फर्जी है। यह अनियमितता सचिव, सहायक परियोजना अधिकारी (एपीओ), तकनीकी सहायक और पंचायत सहायक की मिलीभगत से की जा रही है। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर इस घोटाले की चर्चा जोरों पर है, मगर जिम्मेदार अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा।

[caption id="attachment_94136" align="alignnone" width="495"] एझी ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाला एझी ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाला[/caption]

फर्जी हाजिरी और तालाब का सच

जांच में खुलासा हुआ कि एझी ग्राम पंचायत में तालाब खुदाई का कार्य दिखाया गया, लेकिन मौके पर तालाब पानी से लबालब भरा हुआ है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में 187 मजदूरों की हाजिरी लगातार दर्ज की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, 10 जुलाई 2025 को भी फर्जी डिमांड दर्ज की गई। यह घोटाला केवल कागजी नहीं, बल्कि सरकारी धन की लूट का गंभीर मामला है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारी मिलकर फर्जी फोटो और हाजिरी अपलोड कर रहे हैं, ताकि मनरेगा के फंड का दुरुपयोग किया जा सके। [caption id="attachment_94138" align="alignnone" width="305"]फर्जी हाजिरी और तालाब का सच फर्जी हाजिरी और तालाब का सच[/caption]

MGNREGA Scam Hamirpur: जिम्मेदारों की चुप्पी

इस घोटाले की खबर स्थानीय समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले को दबाने में लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन न तो जिला प्रशासन और न ही मनरेगा के उच्च अधिकारी इसकी सुध ले रहे। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीणों के भरोसे को भी तोड़ रही है।

ग्रामीणों की मांग, होगी कार्रवाई?

एझी ग्राम पंचायत के लोगों ने मांग की है कि इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी सचिव, एपीओ, तकनीकी सहायक और पंचायत सहायक पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजना, जो गरीबों के लिए रोजगार का साधन है, उसका इस तरह दुरुपयोग होना शर्मनाक है। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन इस मामले में गंभीरता दिखाएगा, या यह घोटाला भी अन्य मामलों की तरह दब जाएगा? जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस मामले की पारदर्शी जांच करवाए और दोषियों को सजा दे, ताकि भविष्य में ऐसी धांधली पर रोक लग सके। स्वनेश कुमार की रिपोर्ट

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