मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में एक बड़े अंतरराज्यीय इंश्योरेंस घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें वाहनों के 411 फर्जी दुर्घटना बीमा क्लेम के जरिए करीब 4.30 करोड़ रुपये की राशि हड़प ली गई। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।
‘ऑटो टाई-अप’ पॉलिसियों को निशाना बनाया
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा घोटाला सरकारी बीमा कंपनी ‘द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि सिंडिकेट ने योजनाबद्ध तरीके से पुरानी तस्वीरों, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और नकली बिलों का इस्तेमाल कर बीमा क्लेम पास कराए। जांच में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर मामलों में मारुति और हुंडई जैसी कंपनियों की ‘ऑटो टाई-अप’ पॉलिसियों को निशाना बनाया गया।
जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है
इस पूरे नेटवर्क में ग्वालियर के दो सगे भाइयों सहित तीन मुख्य आरोपियों की भूमिका सामने आई है। साथ ही कई अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई गई है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
यह कार्रवाई ‘द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी’ के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय के उप महाप्रबंधक मयंक कुमार झा की लिखित शिकायत और आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई। रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेजों के जरिए लगातार क्लेम पास कराने की प्रणालीगत गड़बड़ी का खुलासा हुआ।
संभावित अंदरूनी मिलीभगत के संकेत भी मिले हैं
सीबीआई ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद डी. मोरे को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों का कहना है कि यह घोटाला केवल बीमा धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित नेटवर्क और संभावित अंदरूनी मिलीभगत के संकेत भी मिले हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।