दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की विधानसभा सदस्यता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने अधिवक्ता शिवम गौतम के माध्यम से 17 सितंबर को याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि घनश्याम सिंह ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल किए गए चुनावी शपथ पत्र में एक पुराने आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी।
1991 की FIR छिपाने का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि घनश्याम सिंह ने अपने शपथ पत्र में दो आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी, लेकिन वर्ष 1991 में दर्ज एक अन्य FIR का उल्लेख नहीं किया। यह मामला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए चक्काजाम और आंदोलन से जुड़ा बताया जा रहा है। याचिका के मुताबिक उस दौरान करीब 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी, जिसमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था। अब इसी मामले को लेकर उनकी सदस्यता पर सवाल उठाए गए हैं।
उपचुनाव में 6 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे
घनश्याम सिंह ने 30 जुलाई को हुए दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया था। चुनाव परिणाम में घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, जबकि भाजपा के आशुतोष तिवारी को 60,741 मत प्राप्त हुए थे। उपचुनाव के बाद अब चुनावी शपथ पत्र में कथित तौर पर जानकारी छिपाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
विधायक बोले- 40 साल से राजनीति में हूं
मामले पर विधायक घनश्याम सिंह ने कहा कि वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में आंदोलन और प्रदर्शन हुए थे, लेकिन उन्हें किसी केस के दर्ज होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे करीब 40 से 45 साल से सक्रिय राजनीति में हैं और इस दौरान कई आंदोलनों में शामिल रहे हैं। यदि किसी मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया हो और वह उनके संज्ञान में नहीं आया हो, तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं रही।
एफिडेविट में जानकारी देना जरूरी नहीं था
घनश्याम सिंह ने यह भी कहा कि उनके अनुसार चुनावी एफिडेविट में उस मामले की जानकारी देना जरूरी नहीं था, क्योंकि मामला कोर्ट में चालान पेश होने और प्रचलन में आने वाली श्रेणी में नहीं था। विधायक के मुताबिक उन्हें हाईकोर्ट में दायर याचिका की पूरी जानकारी अभी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि याचिका की जानकारी मिलने के बाद वह पूरे मामले पर विस्तार से अपना जवाब देंगे। अब हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया से साफ होगा कि इस याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है।