राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से हटाए गए चंपत राय ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने रामभक्तों के नाम लेटर लिखा। इसमें कहा- 2024 से दानपात्र की गणना के वक्त कथित चोरी को लेकर मेरे खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए गए, लेकिन मैं जानबूझकर मौन रहा।
पहली बार बोले चंपत राय
चंपत राय ने कहा सोमवार को ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की गई थी, जो अब सार्वजनिक हो चुकी है। रिपोर्ट पहले गोपनीय थी, इसलिए मैंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। SIT की अंतिम जांच पूरी होने के बाद ही मैं अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों और दुष्प्रचार का जवाब दूंगा। अंतिम जांच के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।
‘मेरा जीवन खुली किताब की तरह’
लेटर में चंपत राय ने यह भी लिखा कि उन्हें साल 1991 में संगठन की ओर से अयोध्या भेजा गया था। उन्होंने कहा कि उनका करीब 45 सालों का सार्वजनिक जीवन खुली किताब की तरह है और उन्हें विश्वास है कि अंततः सत्य की ही जीत होगी। मैं सत्य का सम्मान करता हूं और अंतिम जांच रिपोर्ट आने का इंतजार करेंगे। राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने खुलकर अपनी बात रखी। कहा- मैं जब ये कहता हूं कि चंपत राय निर्दोष हैं, तो मेरा मतलब है कि इस पूरे कांड के साथ उनका कोई चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता।
‘अपराधी को अपना ड्राइवर रखा’
गोविंद देव गिरि ने कहा एक अपराधी को अपना ड्राइवर रखा। उसके पास चाबियां थीं। सब कुछ वही कंट्रोल करता था। उनके ड्राइवर ने ही यह सब किया है। मुझे शक है कि ड्राइवर बाहरी लोगों से जुड़ा था। यह सब CEO नहीं होने की वजह से हुआ। इसलिए एक CEO लाया जाएगा। दूसरी ओर, ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन दास ने आज कामकाज संभाल लिया है। वहीं, फैजाबाद एंटी करप्शन कोर्ट ने पुलिस को 3 आरोपियों करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्र और लवकुश की 1 दिन की रिमांड दी है। पुलिस ने 7 दिन की रिमांड मांगी।