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दंतेवाड़ा का टूटा पुल- जोखिम भरा सफर बच्चे तार पकड़कर स्कूल जाते हैं

By : Taruna Samariya
दंतेवाड़ा का टूटा पुल- जोखिम भरा सफर बच्चे तार पकड़कर स्कूल जाते हैं

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दंतेवाड़ा में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अचानक आई इस भीषण बाढ़ ने न केवल ग्रामीण इलाकों को जलमग्न किया, बल्कि 23 पुल और पुलियों को भी तहस-नहस कर दिया। इस महामारी ने दंतेवाड़ा के लोगों को राहत शिविरों में जाने को मजबूर कर दिया, जबकि सड़कें टूटने से कई गांव बाहरी दुनिया से कट गए हैं।

बाढ़ का प्रभाव और नुकसान

दंतेवाड़ा जिले में लगभग 118 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसके कारण जिले की सभी नदियाँ और नाले उफान पर आ गए। डंकनी नदी समेत कई नदियों के तेज बहाव ने आसपास के कई इलाकों को झकझोर दिया। बाढ़ की वजह से बड़े-छोटे 23 पुल पुलिया बह गए, जिनमें से 100 मीटर लंबा एक मुख्य पुल भी पूरी तरह बह गया, जिससे इलाके के संपर्क टूट गए। पुल टूटने के कारण कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है।

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जनजीवन की बदहाल स्थिति

इस प्राकृतिक आपदा के चलते दंतेवाड़ा जिले के करीब 1100 लोग प्रभावित हुए, जिन्हें जिला प्रशासन ने राहत शिविरों में शरण दी। राहत शिविरों में खाने, कपड़े, कंबल और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। बाढ़ के पानी ने कई मकानों को क्षतिग्रस्त किया, खेतों में फसलें तबाह हो गई और लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कई इलाके फिलहाल भी जलमग्न हैं और बिजली, मोबाइल नेटवर्क सुविधाओं में बाधा आ रही है।

राहत और पुनर्निर्माण प्रयास

दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर राहत कार्यों में तेजी लाने का आश्वासन दिया है। प्रशासन और स्थानीय पुलिस बचाव और राहत कार्यों में जुटी हुई है। क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत के कार्य शुरू हो चुके हैं ताकि प्रभावित इलाकों को जल्द से जल्द मुख्य संपर्क से जोड़ा जा सके।

दंतेवाड़ा के इस बाढ़ संकट ने न केवल भौतिक संरचनाओं को तहस-नहस किया है, बल्कि लोगों के जीवन में भी गहरा असर डाला है। 23 पुलों के टूटने से आवागमन बाधित हुआ और जनजीवन ठप्प हो गया। हालांकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा रही है, लेकिन यह चुनौती अभी भी बनी हुई है कि कैसे इस प्रकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को फिर से पटरी पर लाया जाए।

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