भोपाल के शाहजहांनाबाद स्थित दारुल शफकत यतीमखाने की करीब 2.7 एकड़ जमीन को लेकर विवाद अब और गहरा गया है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड इस संपत्ति को 1961 से गजट नोटिफाइड वक्फ संपत्ति बता रहा है। बोर्ड की शिकायत पर दारुल शफकत सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शाहिद अलीम खान समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है।
वक्फ बोर्ड ने लगाए गंभीर आरोप
वक्फ बोर्ड का आरोप है कि वक्फ संपत्ति को अपना बताते हुए भवन निर्माण की अनुमति ली गई और जमीन के एक हिस्से को जीवन रेखा अस्पताल को किराए पर दिया गया। बोर्ड के मुताबिक जुलाई 2011 से मई 2025 तक अस्पताल से करीब 1 करोड़ 96 लाख रुपए किराया और 30 लाख रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में प्राप्त हुए। कुल राशि करीब 2.26 करोड़ रुपए बताई गई है, जिसका पूरा हिसाब बोर्ड को नहीं दिए जाने का आरोप है।
28 करोड़ से ज्यादा की रिकवरी का दावा
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल के अनुसार मामले में करीब 28 करोड़ 91 लाख रुपए की आरआरसी जारी की गई है। बोर्ड का कहना है कि कथित वित्तीय नुकसान की रिकवरी कलेक्टर के माध्यम से संबंधित लोगों की चल-अचल संपत्तियों से की जाएगी। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय से वक्फ संपत्ति से होने वाली आय का पूरा हिसाब नहीं दिया गया। दारुल शफकत सोसायटी इन आरोपों से इनकार करती है।
अस्पताल पर रात में ताला लगाने का आरोप
अब विवाद में नया मोड़ आया है। दारुल शफकत सोसायटी ने जीवन रेखा अस्पताल प्रबंधन पर यतीमखाने के एक हिस्से में रात के समय ताला लगाने का आरोप लगाया है। कार्यकारिणी सदस्य परवेज खान के मुताबिक अस्पताल संचालक डॉ. फरीद शेख की ओर से करीब 30 से 40 लोग वहां पहुंचे थे। आरोप है कि नीचे स्थित हिस्से का ताला तोड़कर वहां रखा सिलाई सेंटर का सामान और अन्य सामग्री बाहर निकाल दी गई।
CCTV फुटेज होने का दावा
सोसायटी का कहना है कि जिस हिस्से में सिलाई सेंटर चलता था, वहां कार्यकारिणी की बैठकें भी होती थीं। आरोप है कि सामान बाहर निकालने के बाद अस्पताल का खराब और कंडम सामान अंदर रखकर दोबारा ताला लगा दिया गया। संस्था ने इस पूरी घटना के CCTV फुटेज मौजूद होने का दावा किया है।
पानी की मोटर और टैंक तक पहुंच बंद
सोसायटी के अनुसार ताला लगाए गए हिस्से में पानी का स्टोरेज टैंक, मोटर और पानी भरने के स्विच लगे हैं। यह हिस्सा मुख्य यतीमखाने से स्लाइडिंग गेट के जरिए जुड़ा है। आरोप है कि इस रास्ते को भी लॉक कर दिया गया, जिससे बच्चों के लिए पानी की व्यवस्था प्रभावित हुई।
98 बच्चों के सामने जलसंकट
दारुल शफकत सोसायटी के मुताबिक संस्था के अलग-अलग केंद्रों में करीब 98 बच्चे रह रहे हैं। इनमें लगभग 65 लड़के और 33 लड़कियां शामिल हैं। पानी की समस्या के कारण फिलहाल टैंकर से पानी मंगाया जा रहा है। सोसायटी का आरोप है कि अब यतीमखाने की पानी व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन पर निर्भर हो गई है।
बच्चों की पढ़ाई और रहने की व्यवस्था
संस्था के अनुसार बच्चों के रहने, भोजन और शिक्षा की व्यवस्था दारुल शफकत द्वारा की जाती है। बच्चों को करीब 18 वर्ष की उम्र तक संस्था की देखरेख में रखा जाता है। परवेज खान के मुताबिक काला दरवाजा स्थित केंद्र में बच्चों को इंग्लिश मीडियम से आठवीं तक पढ़ाया जाता है। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जाता है।
विवाद का अगला कदम क्या होगा?
एक तरफ वक्फ बोर्ड जमीन और संपत्ति से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और रिकवरी की बात कर रहा है, वहीं दारुल शफकत सोसायटी अब अस्पताल प्रबंधन पर ताला लगाने और पानी की व्यवस्था प्रभावित करने का आरोप लगा रही है। दोनों पक्षों के दावों के बीच 98 बच्चों की पानी और दैनिक जरूरतों को लेकर स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है।