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बनारस-शहर एक नाम अनेक..जानिए किस नाम का क्या है महत्व

By : divya mistry
बनारस-शहर एक नाम अनेक..जानिए किस नाम का क्या है महत्व

बनारस एक नाम अनेक: जहा जीवन में रस बना रहता है उसे बनारस कहां जाता है। जहा कण कण में शिव का वास रहता है वो बनारस कहलाता है । इतिहास और सभ्यता से पुराना है बनारस अपने आप में दिव्य चरित्र है बनारस। बनारस सभ्यता का प्रथम शहर पृथ्वी के मध्य मे सृजन के स्थान के साथ पवित्र ब्रह्माण्ड का प्रतिक है इसके बावजूद यह मान्यता है कि बनारस पृथ्वी के ऊपर शिव के त्रिशूल के मध्य मे टिका है और सम्पूर्ण सृष्टि के नष्ट हो जाने के बाद भी बनारस शाश्वत है.. क्योंकि यह शिव की नगरी है I बनारस की हवा मे अनुभूति होती है की शिव सरल हैं, शिव शांत हैं, शिव शक्ति भी है शिव शक्ति का स्त्रोत भी है, शिव कर्म भी है और शिव सत्य भी है । इस पवित्र शहर को इसकी विशेषता और शक्ति की कारण कई नामो से बुलाया गया, जैसे शिव को कई नामो से बुलाया जाता है ।

[caption id="attachment_138428" align="alignnone" width="1188"]बनारस-शहर एक नाम अनेक बनारस-शहर एक नाम अनेक[/caption] [caption id="attachment_138429" align="alignnone" width="1186"]काशी काशी[/caption]

काशी - यह इस शिव की नगरी का सबसे प्राचीन नाम है जिसे तीन हज़ार साल से जाना जाता है। काशी का मतलब है प्रकाशमान, चमकदार, ज्ञानवर्धक अर्थात जगमगता हुआ ज्ञान और ऊर्जा का शहर जहां मुक्ति को प्रकाशित किया जाता है जहां जीवन से मुक्ति भी एक उत्सव है।

[caption id="attachment_138430" align="alignnone" width="1184"]वाराणसी वाराणसी[/caption]

वाराणसी - वह शहर जो वर्ना नदी जो गंगा मे उत्तर से समाहित होती है और असि नदी जो गंगा मे दक्षिण से समाहित होती है। इन दोनों नदियों के मध्य मे आने वाला शहर वाराणसी कहलाया । वर्ना का मतलब है बुराइयों और इन्द्रियों को नियंत्रित करना और असि का मतलब है बुराईयों और इन्द्रियों को नष्ट करना अर्थात वह स्थान जो दुनिया से परे और स्वर्ग समान हो यानी वाराणसी वह स्थान है। जो स्वयं बुद्धि की आंख है।

[caption id="attachment_138431" align="alignnone" width="1186"]अविमुक्त अविमुक्त[/caption]

बनारस एक नाम अनेक: अविमुक्त - वह स्थान जहां पृथ्वी पर सबसे पहले शिव को लिंग रूप मे स्थापित किया गया और पूजा की गईंं। प्रलय आने पर भी इस शहर की रक्षा स्वयं शिव और पार्वती करेंगे इसलिए यह शहर अविमुक्त कहलाया ।

[caption id="attachment_138432" align="alignnone" width="1182"]आनंदवन आनंदवन[/caption]

आनंदवन - जहां कण कण मे शिव लिंग के स्वरुप मे विद्यमान हैं निस्वार्थ आनंद से नन्ही कोपलें अंकुरित होती हैं इसलिए इस शहर को आनंद का जंगल यानी आनंदवन कहा जाता है ।

[caption id="attachment_138433" align="alignnone" width="1180"]रुद्रवसा रुद्रवसा[/caption]

रुद्रवसा - जहां इस ब्रह्मांड के सर्वोच्च देवता ने अपना स्थाई निवास बना लिया है जहां की हवा, पानी, अग्नि, धरती सब जगह शिव स्वयं नियंत्रित और निवास करते हैं इसलिए इस शहर को रुद्रवसा यानी शिव के निवास का स्थान कहा जाता है।

[caption id="attachment_138434" align="alignnone" width="1184"]महाशमशान महाशमशान[/caption]

महाशमशान -शमशान वह स्थान है जो मूलतः शहर के बाहर दक्षिण दिशा मे स्थित होता है क्योंकि इस दिशा को मृत्यु के देवता यम का स्थान माना जाता है लेकिन पूरे विश्व मे काशी ही एकमात्र शहर है। जहा महाशमशान है... यानी पूरा शहर ही शमशान है ऐसा माना जाता है की यहा जीवन के साथ साथ मृत्यु को भी उत्सव की तरह मनाया जाता है और मान्यता है की यहाँ मृत्यु पाने वाले व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है ।

इस शिव की नगरी को चाहे जिस भी नाम से बुलाओ पर यह अटल सत्य है की शिव ही पवित्र हैं, जो स्वयं शुद्ध और अशुद्ध के भेदों को चुनौती देते हैं , जो शुभ और अशुभ मे फर्क नहीं करते हैं , वह वो देवता है जो सुन्दर भी हैं और भयावह भी जो अपने शरीर का अभिषेक चन्दन से भी करवाते हैं और भस्म से भी इसलिए यह स्थान मोक्ष और मुक्ति का द्वार है I

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