अंबाला में सिख-किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुए बवाल के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। शुक्रवार को बलदेव नगर और पंजोखरा साहिब थाने में दो अलग-अलग FIR दर्ज की गईं। दोनों मामलों में कुल 16 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। नामजद आरोपियों में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झींडा का नाम भी शामिल है।
प्रदर्शनकारी पंजाब के खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड पर हुए कथित हमले के आरोपियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ गई और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस का दावा है कि भीड़ में कुछ लोग भाले, फरसे, तलवार और अन्य हथियार लेकर पहुंचे थे।
पुलिस ने बताया बवाल के पीछे साजिश
अंबाला के SP अजीत सिंह शेखावत ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर साजिश बताया है। उनके मुताबिक प्रदर्शनकारियों से कई दौर की बातचीत की गई और बार-बार नेशनल हाईवे से जाम हटाने की अपील की गई, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।
SP के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय तक मोर्चा लगाए रखने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने कुछ बल का इस्तेमाल कर हाईवे खाली कराने की कोशिश की। उनका आरोप है कि अंधेरा होते ही कुछ शरारती तत्वों ने पुलिस पर हमला शुरू कर दिया।
पुलिस के मुताबिक भीड़ में शामिल कुछ लोगों के पास भाले, फरसे, तलवार और कुल्हाड़ी जैसे हथियार थे। आरोप है कि कुछ लोगों ने ट्रकों की चाबियां तक छीन लीं, ताकि हाईवे से जाम हटाया न जा सके। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों का रातभर उत्पात मचाने का इरादा था।
गैस टैंकर की चाबी छीनने का आरोप
SP अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान एक गैस टैंकर भी जाम में फंस गया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से टैंकर को रास्ते से हटाने देने की अपील की, क्योंकि उसमें गैस होने के कारण किसी भी तरह की हिंसा या आगजनी बड़ा हादसा पैदा कर सकती थी।
पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने गैस टैंकर के ड्राइवर से उसकी चाबी छीन ली और वहां से भाग गए। SP ने इसे बड़ी शरारत की साजिश बताते हुए कहा कि अगर टैंकर को नुकसान पहुंचता तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे।
पुलिस अब पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की पहचान CCTV फुटेज और मौके पर मौजूद वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए करने में जुटी है।
DSP समेत 9 पुलिसकर्मी घायल
अंबाला पुलिस की ओर से 14 अगस्त को जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक बवाल के दौरान DSP वीरेंद्र समेत 9 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। पुलिस का दावा है कि CIA-2 इंचार्ज पर तलवार से सीधा वार किया गया।
अधिकारी ने बॉडी प्रोटेक्टर पहना हुआ था, जिसकी वजह से उनकी जान बच गई। हालांकि तलवार का वार इतना तेज था कि बॉडी प्रोटेक्टर तक कट गया। पुलिस के मुताबिक अन्य कर्मचारियों पर भी तलवार, गंडासे, कुल्हाड़ी और भाले जैसे हथियारों से हमला किया गया।
इसके अलावा कानून व्यवस्था ड्यूटी में लगी पुलिस की करीब 8 गाड़ियों में तोड़फोड़ किए जाने का भी आरोप है। पुलिस ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में भी कार्रवाई की है।
16 लोगों पर गंभीर धाराओं में केस
DSP जगबीर के मुताबिक बलदेव नगर थाने में दर्ज मामले में 16 लोगों को नामजद किया गया है। इसके अलावा अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
पुलिस ने BNS की धारा 109 यानी हत्या के प्रयास, 115(2), 118 और 117(2) सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की है। इसके अलावा नेशनल हाईवे एक्ट, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।
पुलिस का कहना है कि हाईवे पर पहुंचने से पहले पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे में बड़ी संख्या में भीड़ जुटी थी। आरोप है कि भीड़ ने बैरिकेड तोड़कर हाईवे की ओर बढ़ने की कोशिश की। दोनों FIR में नामजद अधिकांश लोग HSGMC से जुड़े बताए जा रहे हैं।
झींडा बोले- CM हाउस से आया था फोन
HSGMC प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने पुलिस के आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि प्रशासन के साथ उनकी बातचीत चल रही थी। झींडा के मुताबिक उनके दो युवकों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया और 14 दिन के लिए जेल भेज दिया गया, जबकि गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
झींडा का दावा है कि बातचीत के दौरान अधिकारियों के पास मुख्यमंत्री आवास से फोन आया था। उन्होंने कहा कि उन्हें दो दिन बाद गिरफ्तार युवकों को रिहा करने का आश्वासन दिया गया था।
झींडा के अनुसार वे धरना खत्म करने की घोषणा करने वाले थे, लेकिन इसी दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन उनके लोगों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कर रहे हैं।
25 अगस्त तक का अल्टीमेटम
शुक्रवार शाम कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा पातशाही छठी में HSGMC की बैठक हुई। बैठक में प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम पर चर्चा की गई। झींडा ने कहा कि गुरसिमरन सिंह मंड ने गुरुघर की मर्यादा और कानून का उल्लंघन किया था और यहीं से विवाद शुरू हुआ।
बैठक के बाद प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखने का फैसला लिया गया। इनमें गुरसिमरन सिंह मंड और उनके बेटे की गिरफ्तारी, गिरफ्तार किए गए दोनों सिख युवकों की रिहाई और 16 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग शामिल है।
HSGMC ने इन मांगों को लेकर प्रशासन को 25 अगस्त तक का समय दिया है। झींडा ने कहा कि इसके बाद पीपली अनाज मंडी में आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।
पुलिस बोली- वीडियो से आरोपियों की पहचान जारी
अंबाला पुलिस का कहना है कि नेशनल हाईवे खुलवाने की कार्रवाई के दौरान कुछ हथियारबंद उपद्रवियों ने पुलिस बल पर जानलेवा हमला किया। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की मांग पर FIR दर्ज किए जाने के बावजूद कुछ लोगों ने बातचीत के बाद भी माहौल खराब करना जारी रखा।
पुलिस अब CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है। मामले में नामजद लोगों के अलावा अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस और HSGMC की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि बवाल के दौरान किसकी क्या भूमिका रही और हिंसा की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई।