Punjab news: पंजाब की राजनीति में एक अलग पहचान बना चुके मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संघर्ष, विचार और शासन के विज़न को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक कलाकार से मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर बदलाव की मिसाल बन गया है। ‘हरी कलम’ को जनता के भरोसे का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि अब उनका हर फैसला सीधे लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए है।
संघर्ष से सत्ता तक का सफर

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि एक समय वह ₹100 की दिहाड़ी पर काम करते थे और अपने राजनीतिक व्यंग्य के जरिए व्यवस्था पर चोट करते थे। साल 2022 में सत्ता संभालने के बाद उनके हाथ में ‘हरी कलम’ आई, जो अब बदलाव का माध्यम बन चुकी है। उन्होंने स्वीकार किया कि 70 वर्षों की कमियों को कुछ ही वर्षों में दूर करना आसान नहीं, लेकिन सरकार निरंतर सुधार की दिशा में काम कर रही है।
गरीबों के लिए योजनाएं जारी रहेंगी
सीएम मान ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी द्वारा दी गई 300 यूनिट मुफ्त बिजली जैसी योजनाएं जारी रहेंगी। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब नेताओं को कई सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं, तो गरीबों को राहत देने पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि गरीब भले ही प्रत्यक्ष कर न दे, लेकिन हर वस्तु पर अप्रत्यक्ष कर के रूप में योगदान करता है, इसलिए उसे सुविधाएं मिलना उसका अधिकार है।
केंद्र पर भेदभाव का लगाया मान ने आरोप
केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए मान ने कहा कि पंजाब के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का ₹9000 करोड़ का ग्रामीण विकास फंड रोका गया है। किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसी कारण केंद्र पंजाब के प्रति कठोर रवैया अपनाता है।

फसल बीमा योजना पर सवाल
फसल बीमा योजना को ‘फ्लॉप’ बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलता। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ के दौरान पंजाब सरकार ने देश में सबसे अधिक ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवजा दिया, जो किसानों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दर्शाता है। शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव का जिक्र करते हुए सीएम मान ने कहा कि अब पंजाब के किसी भी स्कूल में बच्चे जमीन पर नहीं बैठते। ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ और आधुनिक सुविधाओं के चलते सरकारी स्कूलों के छात्र अब जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं।
