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भारत..एक बड़ा AI बाजार
सैम ऑल्टमैन ने भारत को AI का लीडर मानने के बावजूद भारत की वास्तविक स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि OpenAI के लिए भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है, जबकि पहला बाजार अमेरिका है। इसका मतलब यह है कि भारत AI के क्षेत्र में एक प्रमुख बाजार बन सकता है, लेकिन अभी यह बाजार के रूप में ही देखा जा रहा है, न कि तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में।सैम ऑल्टमैन का व्यक्तिगत और करियर सफर
सैम ऑल्टमैन का जन्म 1985 में सेंट लुइस, शिकागो में हुआ था, और वे बचपन में ही संख्याओं और कंप्यूटिंग के प्रति अपनी रुचि दिखाने लगे थे।
19 वर्ष की उम्र में, उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी को छोड़कर लूप्ट नामक सोशल नेटवर्किंग एप्लिकेशन की सह-स्थापना की थी। लूप्ट का प्रदर्शन अच्छा रहा - एक समय तो इसने 30 मिलियन डॉलर भी जुटा लिए - लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चला। 43 मिलियन डॉलर से अधिक के मूल्यांकन पर, ऑल्टमैन और उनके सहयोगियों ने 2012 में कंपनी को बेच दिया।
हालांकि लूप्ट को बिकने के बाद उन्होंने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना करियर जारी रखा, जिससे उन्होंने दुनिया के सबसे प्रभावशाली टेक्नोलॉजी लीडर्स में एक जगह बनाई।
OpenAI CEO Sam Visits India: OpenAI का उदय और सफलता
11 दिसंबर 2015 को OpenAI ऑफिशियली लॉन्च हुआ जिसमें सैम ऑल्टमैन और उनके साथी इलॉन मस्क, सैम ऑल्टमैन, ग्रेग ब्रॉकमैन, इल्या सुतस्केवर, वोजेक जरंबा, जॉन शुलमैन जैसे टेक्निकल एक्सपर्ट्स और AI रिसर्चर ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नई क्रांति की शुरुआत की। OpenAI ने कई प्रमुख उत्पाद लॉन्च किए हैं, जिनमें GPT-3, DALL-E और ChatGPT शामिल हैं। इन उत्पादों ने AI को अधिक इंसानियत से जुड़ा और उपयोगी बनाया है, जिससे लाखों यूजर्स ने इसका उपयोग करना शुरू किया। साल 2024 में कंपनी के लिए 57,167 करोड़ रुपए जुटाए, जिसके बाद कंपनी का वैल्यूएशन 13.60 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।OpenAI फंड की कमी और मस्क हुए थे अलग..
2018 में OpenAI की कहानी ने एक नया मोड़ लिया। AI रिसर्च में अत्यधिक खर्च हो रहा था, और एक AI मॉडल को विकसित करने में करोड़ों डॉलर की जरूरत थी। इसने कंपनी के मैनेजमेंट को यह एहसास दिलाया कि केवल डोनेशन्स पर निर्भर रहकर मिशन को पूरा नहीं किया जा सकता। इसी बीच, 2018 में एलोन मस्क ने भी OpenAI को छोड़ दिया क्योंकि Tesla का AI डिवीजन तेजी से बढ़ रहा था, जिससे दोनों के बीच तालमेल बैठाना मुश्किल हो रहा था।
इसके बाद, 2019 में OpenAI ने अपनी संरचना को बदलते हुए खुद को नॉन-प्रॉफिट से कैप्ड-प्रॉफिट में परिवर्तित कर दिया और एक नई शाखा, OpenAI LP, की शुरुआत की। इस बदलाव ने कुछ विवाद उत्पन्न किया, लेकिन सैम ऑल्टमैन ने कहा, "हम अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए पैसे कमाएंगे, लेकिन हमारा उद्देश्य हमेशा लोगों की भलाई के लिए रहेगा।"
इसी समय Microsoft ने OpenAI में 1 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश किया और OpenAI का काम तेजी से बढ़ने लगा।