असम के डिब्रूगढ़ में झारखण्ड सीएम सोरेन ने आयोजित की अहम बैठक, आदिवासी और वंचित वर्गों पर रखा फोकस

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असम के डिब्रूगढ़ में झारखण्ड सीएम सोरेन ने आयोजित की अहम बैठक, आदिवासी और वंचित वर्गों पर रखा फोकस

असम के डिब्रूगढ़ में झारखण्ड सीएम सोरेन ने आयोजित की अहम बैठक आदिवासी और वंचित वर्गों पर रखा फोकस

Jharkhand news: जल्द ही होने वाले असम विधानसभा चुनाव से पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सक्रियता ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रचार अभियान और रणनीतिक बैठकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि उनकी मौजूदगी भाजपा के लिए चुनौती बनेगी या कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों असम में डेरा जमाए हुए हैं। वे पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं और लगातार पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति को धार दे रहे हैं।

सोमवार को असम के डिब्रूगढ़ में सीएम सोरेन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विस्तृत रणनीति और जनसंपर्क कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई।

[caption id="attachment_139740" align="alignnone" width="1003"]झारखण्ड CM हेमंत सोरेन झारखण्ड CM हेमंत सोरेन[/caption]

जमीनी पकड़ मजबूत करने पर जोर

बैठक में आदिवासी, शोषित और वंचित समाज बहुल क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। हेमंत सोरेन ने कहा कि झामुमो हमेशा से इन वर्गों के अधिकारों और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और असम में भी इसी विचारधारा के आधार पर चुनाव लड़ा जाएगा।

उन्होंने चुनाव को केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि पहचान, जमीन और आवास के अधिकारों की लड़ाई बताया। सोरेन ने आरोप लगाया कि असम की सरकारों ने आदिवासी समुदाय की अनदेखी की है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा है।

झारखंड मॉडल का जिक्र

[caption id="attachment_143322" align="alignnone" width="1200"]जेएमएम का पार्टी चिन्ह जेएमएम का पार्टी चिन्ह[/caption]

हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में झारखंड सरकार की योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि वहां गरीबों को तीन कमरे का आवास और महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसी तरह की योजनाएं असम में क्यों लागू नहीं की जा सकतीं। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है जब आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाए।

एकजुटता और अनुशासन पर जोर

बैठक के अंत में सभी कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों ने आगामी चुनाव में पूरी प्रतिबद्धता, अनुशासन और एकजुटता के साथ मैदान में उतरने का संकल्प लिया। वरिष्ठ नेताओं ने जमीनी स्तर पर काम करने के लिए विस्तृत रोडमैप भी प्रस्तुत किया। इस बैठक में मंत्री चमरा लिंडा समेत झामुमो के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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