कौन थे हड़प्पा काल के लोग? राखीगढ़ी के 5000 साल पुराने कंकाल देंगे जवाब

राखीगढ़ी के प्राचीन अध्ययन

कौन थे हड़प्पा काल के लोग? राखीगढ़ी के 5000 साल पुराने कंकाल देंगे जवाब

हरियाणा के राखीगढ़ी में मिले प्राचीन कंकालों का अध्ययन से हड़प्पा काल की जीवनशैली, स्वास्थ्य और प्रवास संबंधी जानकारियाँ प्राप्त होंगी।

कौन थे हड़प्पा काल के लोग राखीगढ़ी के 5000 साल पुराने कंकाल देंगे जवाब

हरियाणा के विश्वप्रसिद्ध राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल से प्राप्त मानव कंकाल अवशेषों पर अब अत्याधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इन अवशेषों को अनुसंधान के लिए भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई) को सौंप दिया है। इस अध्ययन से हड़प्पा काल के लोगों की उत्पत्ति, जीवनशैली, स्वास्थ्य और प्रवास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।

एएसआई और एएनएसआई के बीच समझौते के तहत शुरू हुआ अध्ययन

भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के निदेशक प्रोफेसर बी. वी. शर्मा के अनुसार, एएसआई और एएनएसआई के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य सिंधु-सरस्वती सभ्यता पर बहुविषयक वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देना है।अवशेषों पर प्राचीन डीएनए (Ancient DNA), समस्थानिक (Isotope) और अस्थिविज्ञान (Osteology) सहित कई आधुनिक तकनीकों की सहायता से अध्ययन किया जाएगा।

उत्खनन में मिली थीं आठ कब्रें

वर्ष 2025-26 के उत्खनन सत्र के दौरान राखीगढ़ी के टीला संख्या-7 में आठ कब्रें मिली थीं। इनमें तीन पूर्ण मानव कंकाल और अन्य अस्थि अवशेष प्राप्त हुए थे।इन सभी अवशेषों को विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण के लिए कोलकाता स्थित एएनएसआई की प्रयोगशाला भेजा गया है।

क्या पता लगाने की कोशिश करेंगे वैज्ञानिक?

विशेषज्ञों के अनुसार अध्ययन के दौरान निम्न पहलुओं की जांच की जाएगी

  • हड़प्पा कालीन लोगों की आनुवंशिक पृष्ठभूमि

  • उनकी भौगोलिक उत्पत्ति

  • स्वास्थ्य और पोषण संबंधी स्थिति

  • जीवनशैली और सामाजिक संरचना

  • संभावित प्रवास और जनसंख्या संबंध

  • पर्यावरणीय परिस्थितियों का प्रभाव

वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन डीएनए अध्ययन से उस समय की आबादी और अन्य क्षेत्रों के लोगों के बीच संबंधों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

भारत में सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल है राखीगढ़ी

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संयुक्त महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल के अनुसार, भारतीय उपमहाद्वीप में सिंधु और सरस्वती नदी तंत्र के किनारे विकसित सभ्यता को सिंधु घाटी या हड़प्पा सभ्यता कहा जाता है।मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे प्रमुख स्थल वर्तमान पाकिस्तान में स्थित हैं, जबकि भारत में राखीगढ़ी, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा और बनावली जैसे महत्वपूर्ण हड़प्पा स्थल मौजूद हैं।इन सभी में राखीगढ़ी का विस्तार सबसे अधिक माना जाता है। यहां प्रारंभिक हड़प्पा, विकसित हड़प्पा और उत्तर हड़प्पा काल के अवशेष मिले हैं, जो लगभग 5000 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व तक के कालखंड को दर्शाते हैं।

सिंधु-सरस्वती सभ्यता के इतिहास को मिलेगी नई दिशा

अधिकारियों के अनुसार यह शोध विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से किया जाएगा। अध्ययन के निष्कर्ष सिंधु-सरस्वती सभ्यता के जैविक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन सभ्यताओं के विकासक्रम और मानव इतिहास के कई अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर खोजने में सहायक साबित होगा।

 

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