राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया बस्तर पंडुम का शुभारंभ, आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा जगदलपुर

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया बस्तर पंडुम का शुभारंभ, आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा जगदलपुर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया बस्तर पंडुम का शुभारंभ आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा जगदलपुर

president droupadi murmu bastar pandum: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचीं और यहां आदिवासी संस्कृति के सबसे बड़े आयोजन बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया. लालबाग मैदान में जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, पूरा माहौल लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र और जनजातीय रंगों से भर गया. राष्ट्रपति ने भी स्टॉल से लेकर मंच तक, बस्तर की सांस्कृतिक झलक को बेहद करीब से देखा. [caption id="attachment_132858" align="alignnone" width="653"]शुभारंभ पर राष्ट्रगान शुभारंभ पर राष्ट्रगान[/caption]

president droupadi murmu bastar pandum: लालबाग मैदान में बस्तर पंडुम का आगाज़

जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें ढोकरा आर्ट से बना कर्मा वृक्ष और कोसा शिल्प से तैयार गमछा भेंट किया. कार्यक्रम शुरू होने से पहले राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया, जहां बस्तर की जीवनशैली, वेशभूषा, पारंपरिक वाद्ययंत्र और रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिली. सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने राष्ट्रपति को खासा प्रभावित किया.

president droupadi murmu bastar pandum: आदिवासी संस्कृति को करीब से देखा

बस्तर पंडुम के मंच पर कई जनजातियों के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और अनोखे वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां दी गईं. रंग-बिरंगी वेशभूषा और पारंपरिक आभूषणों में सजे कलाकारों ने बस्तर की जीवंत संस्कृति को मंच पर उतार दिया. राष्ट्रपति मुर्मू कार्यक्रम के दौरान कलाकारों और स्टॉल संचालकों से बातचीत करती भी नजर आईं, जिससे माहौल और आत्मीय हो गया. [caption id="attachment_132859" align="alignnone" width="617"]सीएम ने किया संबोधित सीएम ने किया संबोधित[/caption]

पंडुम सिर्फ आयोजन नहीं, संस्कृति का मंच है- सीएम साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि मां दंतेश्वरी की पावन भूमि पर राष्ट्रपति का आगमन पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम का निमंत्रण स्वीकार कर अपना बहुमूल्य समय दिया, इसके लिए प्रदेश की तीन करोड़ जनता की ओर से वे आभार प्रकट करते हैं. सीएम साय ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को समर्पित एक मंच है. बस्तर सिर्फ जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान भी है.

क्या है बस्तर पंडुम

बस्तर पंडुम आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ माना जाता है. नौ फरवरी तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में जनजातीय जीवनशैली, मान्यताएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाता है. यह उत्सव लोककला, परंपराओं और जनजातीय पहचान को मजबूती देने वाला मंच है, जिसके जरिए बस्तर की संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है.
12 विधाओं में दिखेगा बस्तर का रंग
इस बार बस्तर पंडुम में 12 विधाओं की प्रस्तुतियां की जा रही हैं. इसमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा पद्धति, बस्तर शिल्प और जनजातीय चित्रकला शामिल हैं. इसके साथ ही पारंपरिक व्यंजन, जनजातीय पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और बस्तर की वन औषधियों को लेकर भी लोगों को जानकारी दी जा रही है.  

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