मुरादाबाद का सपा कार्यालय खाली करने का आदेश
एक पुराने आवंटन से नया विवाद
मुलायम सिंह कोठी विवाद: मुरादाबाद की सिविल लाइंस में स्थित वही कोठी — जिसे 13 जुलाई 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नाम पर आवंटित किया गया था — आज फिर सुर्खियों में है। यह इमारत अब समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय के रूप में इस्तेमाल हो रही है, लेकिन प्रशासन ने कहा है कि पिछले एक साल से किराया नहीं भरा गया और आवंटन नियमों के उल्लंघन के चलते इसे खाली कराया जाए। सपा ने प्रशासन के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है। Read More:- Best life changing habits: ज़िंदगी को आसान बनाने वाले 5 छोटे बदलाव जो आपकी सोच ही बदल देंगे.मामला क्या है- घटनाक्रम का संक्षेप
- आवंटन: 13 जुलाई 1994 को कोठी मुलायम सिंह यादव के नाम आवंटित की गई थी।
- वर्तमान उपयोग: सपा का जिला कार्यालय, जिसमें मुलायम सिंह की तस्वीर के साथ अन्य पार्टी नेताओं की तस्वीरें भी लगी हैं।
- प्रशासन की ओर से नोटिस: 31 जुलाई को एक माह के भीतर कोठी खाली करने का आदेश। कारण — किराया न जमा होना और सरकारी उपयोग के लिए भवन की आवश्यकता।
- कानूनी कार्रवाई: सपा जिलाध्यक्ष जयवीर यादव की ओर से हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई है।
मुलायम सिंह कोठी विवाद: क्यों बन गया राजनीतिक बवाल?
यह मामला सिर्फ संपत्ति का नहीं है — भावनाओं और राजनीतिक सत्ता के संकेतों से जुड़ा है। मुलायम सिंह यादव का नाम और उनकी विरासत सपा के लिए प्रतीकात्मक मायने रखती है। इसलिए जब प्रशासन ने आवंटन रद्द करने और कब्जा लेने की बात कही, तो सियासी बहस तेज़ हो गई। Read More:- क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी सुबह की शुरुआत कैसी होनी चाहिए? मुलायम सिंह कोठी विवाद: अखिलेश यादव ने इस मसले पर तीखा रुख अपनाया और चेतावनी दी कि अगर अधिकारियों ने बुलडोजर से ऑफिस हटाने की कोशिश की तो भाजपा के स्मारक सुरक्षित नहीं रहेंगे — बयान ने मामले को और गरमाया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने पलट कर कहा कि सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करना सपा की आदत रही है और कोठी उन्हें खाली करनी ही पड़ेगी।