Jharkhand news: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सियासी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन 18 अप्रैल, शनिवार से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन में चुनाव प्रचार शुरू करने जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस कदम को विपक्षी एकजुटता की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पड़ सकता है।
जंगलमहल में फोकस, आदिवासी वोट पर रहेगी नजर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखण्ड सीएम सोरेन का मुख्य फोकस बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर जैसे जंगलमहल के इलाके होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन क्षेत्रों के आदिवासियों का झारखंड से गहरा सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव है। ऐसे में सोरेन की मौजूदगी TMC के लिए अहम साबित हो सकती है।

बताया जा रहा है कि इन इलाकों में भाजपा ने पिछले चुनावों में मजबूत पकड़ बनाई थी, जिसे तोड़ने के लिए यह रणनीति तैयार की गई है।
तृणमूल के अभिषेक बनर्जी के साथ बनायीं रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी और सीएम सोरेन के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह चुनावी प्लान तैयार किया गया है। दोनों नेताओं की व्यक्तिगत समीपता भी इस गठजोड़ को मजबूती दे रही है। इस अभियान के जरिए आदिवासी मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश होगी कि भाजपा के खिलाफ क्षेत्रीय ताकतें एकजुट हैं।
TMC को मिला समर्थन, JMM नहीं उतारेगी उम्मीदवार
जानकारी के अनुसार, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस बार बंगाल चुनाव में खुद उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला लिया है और वह पूरी तरह TMC का समर्थन कर रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों का एक मंच पर आना जरूरी है।
चुनाव प्रचार से बढ़ेगी सियासी गर्मी
हेमंत और कल्पना सोरेन का यह संयुक्त प्रचार अभियान बंगाल चुनाव में नई ऊर्जा भर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ चुनाव प्रचार नहीं, बल्कि पूर्वी भारत में क्षेत्रीय दलों की ताकत दिखाने का प्रयास भी है।
