बांधवगढ़: बाघों के लिए मशहूर उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अफसर और कर्मचारी इन दिनों हाथियों की खातिरदारी में लगे हैं। खातिरदारी भी ऐसी, जैसी बारातियों की होती है।
7 दिन हॉलिडे पर हाथी
जंगल में सुबह मेडिकल चेकअप के बाद शुरू हुआ हाथियों का स्पा, मालिश और मेकअप दोपहर तक चलता है। लंच में शहद लगी रोटियों के साथ सेब, केले, अनानास के साथ गन्ना और तमाम तरह के फल भरपेट खाने के बाद आराम का भी इंतजाम है। हर सार हाथियों के लिए लगता है कैंप हर साल अगस्त के दूसरे पखवाड़े से सितंबर के आखिरी सप्ताह तक नेशनल पार्कों में हाथियों के लिए रिजुविनेशन कैंप यानी कायाकल्प शिविर लगाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2011 से हुई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला परिक्षेत्र में 24 सितंबर से 30 सितंबर तक कैंप शुरू हुआ है। इसमें विभाग के 15 हाथी शामिल हैं। इनमें 9 नर और 6 मादा और तीन बच्चे शामिल हैं। इनमें सबसे बुजुर्ग 79 वर्ष का हाथी गौतम है। इसे 9 मार्च 1978 को कान्हा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लाया गया था।

मेकअप से साथ मसाज भी
इसलिए लगाया जाता है कैंप बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय का कहना है कि कैंप का उद्देश्य हाथियों के हेल्थ चेकअप के साथ उनको आराम देना है। हाथियों और टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रहने वाले लोगों को वन्य जीव संरक्षित करने के प्रति जागरूक करना भी है। इसके अलावा, हाथियों की स्वास्थ्य की जानकारी भी प्रबंधन के पास आ जाती है। उनके व्यवहार की रिपोर्ट भी तैयार होती है।

मजे का खाना औरव डॉक्कर की देखभाल
ऐसे होती है हाथियों की पिकनिक साल भर काम करने के बाद हाथियों को आराम, पौष्टिक आहार और विशेष देखभाल दी जाती है। इस दौरान हाथियों को तेल की मालिश, नीम और अरंडी का तेल लगाया जाता है। यह एक तरह से हाथियों की पिकनिक होती है, जो उनकी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बढ़ाती है। साथ ही, महावतों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की भी जांच की जाती है।
एक की काम, खाओ, पीओ और मौज करो
सुबह नहलाने के बाद सिंदूर-गुलाल से मेकअप कैंप के दौरान शुरुआत में सुबह-सुबह नहलाने के बाद तेल मालिश कर चंदन का लेप लगाया जाता है। इसके बाद सिंदूर और गुलाल से मेकअप किया जाता है। टाइगर रिजर्व के अधिकारी कहते हैं कि हाथी लगातार काम करते हैं, लेकिन इन सात दिनों के लिए उनसे काम नहीं लिया जाता। इस दौरान उनका काम सिर्फ एक है, खाओ, पीओ और मौज करो।

79 वर्ष का गौतम आकर्षण
सबसे बुजुर्ग गौतम और सबसे छोटा हाथी गंगा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय बताते हैं कि दोपहर में भोजन के बाद हाथियों को विचरण के लिए जंगल में छोड़ दिया जाता है। उनके स्वास्थ्य की जांच कर ब्लड सैंपल लेकर लैब भेजे जाएंगे। बांधवगढ़ में 12 हाथियों के साथ तीन शावक भी हैं। कैंप में सबसे बुजुर्ग हाथी गौतम 79 वर्ष का है, जबकि गंगा की उम्र एक वर्ष है। हाथियों के बिना गश्त संभव नहीं टाइगर रिजर्व में इन हाथियों से विभागीय कार्य कराए जाते हैं। जंगल ट्रैकिंग के साथ रेस्क्यू और गश्त में हाथियों की मदद ली जाती है। सबसे ज्यादा इनका उपयोग गश्त में किया जाता है। बाघ या तेंदुए के रेस्क्यू के समय भी इनका उपयोग करते हैं। हाथियों के बिना रेस्क्यू संभव नहीं है।
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