Shri Tilbhandeshwar Mahadev Temple: 2500 साल पुराना शिव मंदिर, जहां हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार!

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Shri Tilbhandeshwar Mahadev Temple: 2500 साल पुराना शिव मंदिर, जहां हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार!

shri tilbhandeshwar mahadev temple 2500 साल पुराना शिव मंदिर जहां हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार

Shri Tilbhandeshwar Mahadev Temple: भारत देश में भगवान भोलेनाथ के तो वैसे हजारों मंदिर हैं। लेकिन काशी में भोलेनाथ का ऐसा मंदिर है, जहां हर साल शिवलिंग का आकार बढ़ता है। बताया जाता है कि यह मंदिर लगभग 2500 साल पुराना है। यह मंदिर तिलभांडेश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। आइए जानते इस मंदिर की मान्यताओं और भव्यता के बारें में...

क्या है यहां की मान्यता?

स्थानीय निवासी बताते हैं कि, यहां विराजमान शिवलिंग लगभग 2500 साल पुराना है, जिसका आकार हर साल बढ़ता है। कहते हैं यहां मकर संक्रांति के दिन भगवान का आकार तिल के आकार के बराबर बढ़ता है। कहते हैं यहां विराजमान शिवलिंग स्वंयभू हैं। यहां विराजमान शिवलिंग सतयुग से अस्तित्व में है, यहां लक्ष्मी - नारायण, मां दुर्गा और बजरंग बली की प्रतिमाएं विराजमान हैं।

सतयुग के समय का है शिवलिंग

कहा जाता है कि यह शिवलिंग सतयुग के समय का है। कहते है पहले शिवलिंग का आकार सामान्य था लेकिन द्वापर युग के समय शिवलिंग का आकार बढ़ने लगा तो जब कलयुग आया तो भक्तो को उनका बढ़ता आकार देखकर चिंता होने लगी फिर भक्तों ने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान भोलेनाथ इससे प्रसन्न होकर कहा कि वो सिर्फ साल में एक बार ही बढ़ेंगे। उस समय से ही शिवलिंग का आकार साल में एक बार ही बढ़ता है।

काशी में विराजमान हैं सतयुग के शिवलिंग

काशी विश्वनाथ मंदिर से 2 किलोमीटर की दूरी पर पांडे हवेली की गली में भगवान भोलेनाथ का मंदिर है यहां उनके साथ माता पार्वती भी विराजमान है। इस मंदिर को तिलभांडेश्वर मंदिर भी कहते हैं। इस नाम को सुनकर ही समझ आता है, कि इस मंदिर का तिल से जरुर कोई संबंध है। कहते हैं यहां भगवान बोले नाथ को तिल अर्पित की जाती है, यहां विराजमान शिवलिंग की आकृति सभी शिवलिंगों से बहुत अलग है वो किसी गुंबद की तरह दिखाई देते हैं।

भक्तो की मनोकामना होती है पूरी

कहते है भक्त यहां भगवान से अपनी मनोकामना मांगते हैं, सच्चे दिल से जो मांगा जाए वो मनोकामना पूरी होती है, जिस भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, वो इस मंदिर में आकर भगवान को तिल अर्पित करता है।

मां शारदा से जुड़ा हुआ एक किस्सा

बताया जाता है कि, इस मंदिर में मां शारदा ने तपस्या की थी, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें वरदान भी दिया था। बता दें कि, काशी को 2 भागों में बांटा गया है, एक भाग काशी खंड कहलाता है, वहीं दूसरा खंड केदारखंड कहलाता है। यह मंदिर केदार खंड की ओर विराजमान है। वहीं बाबा विश्वनात और महामृत्युंजय काशी खंड में विराजमान है। यहां मंदिर के गर्भगृह में लगभग 3.5 फीट के शिवलिंग विराजमान हैं।

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