Indore Kaal Bhairav Temple: ऐसा मंदिर जहां काल भैरव बाबा को मदिरा के साथ चढ़ाई जाती है सिगरेट!

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Indore Kaal Bhairav Temple: ऐसा मंदिर जहां काल भैरव बाबा को मदिरा के साथ चढ़ाई जाती है सिगरेट!

indore kaal bhairav temple ऐसा मंदिर जहां काल भैरव बाबा को मदिरा के साथ चढ़ाई जाती है सिगरेट

Indore Kaal Bhairav Temple: मध्यप्रदेश में काल भैरव बाबा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर उज्जैन में है, जहां भैरव बाबा को मदिरापान कराया जाता है। ठीक वैसे ही एक काल भैरव का मंदिर इंदौर में है, जो की प्राचीन मंदिर इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के समकालीन माना जाता है। यहां कि खास बात यह है कि काल भैरव बाबा को न सिर्फ मंदिरापान कराया जाता है, बल्कि उन्हें सिगरेट भी पिलाई जाती है।

Indore Kaal Bhairav Temple: मदिरा के अलावा सिगरेट का लगता है भोग!

मध्य प्रदेश में स्थित उज्जैन शहर के अलावा एक और प्रसिद्ध भैरव बाबा का मंदिर है। वहां भी काल भैरव को मदिरापान कराया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इतना ही नही यहां मदिरा के अलावा बाबा को सिगरेट भी चढ़ाई जाती है। यह मंदिर मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के पंढरीनाथ चौराहे में स्थित है। और यह मंदिर बेहद प्राचीन है।

Indore Kaal Bhairav Temple: मुख्यद्वार में दिए गए हैं इंस्ट्रक्शन

भैरव बाबा मंदिर के मुख्यद्वार में एक पोस्टर लगा है, जिसमें लिखा गया है कि किस जगह मदिरापान कराने जाएं। उसके दिशा - निर्देश जारी किए गए हैं। यहां आकर एक शुकून मिलता है और अलग शक्ति का अनुभव होता है। इस मंदिर में दूर – दूर से भक्त काल भैरव बाबा के दर्शन करने आते हैं।

सदियो पुराना है मंदिरा

यह मंदिर इंदौर के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। काल भैरव का मंदिर इंद्रेश्वर महादेव मंदिर का समकालीन मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि उज्जैन के बाद यह एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां काल भैरव बाबा को मदिरापान करवाया जाता है। स्थानीय निवासी के मुताबिक, प्राचीन समय से ही मदिरापान की परंपरा की शुरुआत हुई थी। यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में आकर कालभैरव बाबा के दर्शन करते है और उन्हें मदिरापान कराते है और सिगरेट भी चढ़ाते हैं। Also Read-Gutkeshwar Mahadev Temple: इंदौर में ऐसा मंदिर जहां पानी में डूबे हुए हैं शिवलिंग!

विशेष रुप से इस दिन होती है पूजा

इस मंदिर में विशेष रुप से रविवार के दिन काल भैरव की पूजा की जाती है। उनका श्रृंगार किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु दूर- दूर से भगवान के दर्शन करने आते है। अमावस्या के दिन विशेष रुप से हवन-पूजन का आयोजन किया जाता है।   Also Read - Basant Panchami Date 2026: बसंत पंचमी कब है? जानिए इस त्योहार का महत्व…

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