CDV Virus Threat Looms Over Gujarat Lions, MP Tige

जंगल के राजा पर वायरस का खतरा!: गुजरात में 12 और MP में 10 बाघों की मौत

गुजरात के गिर और MP के कान्हा में शेरों और बाघों की मौतों से चिंता बढ़ी। संदेह है कि मौतें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और बेबेसिया संक्रमण से हुईं।

By : नरेंद्र सिंह
जंगल के राजा पर वायरस का खतरा!: गुजरात में 12 और MP में 10  बाघों की मौत

गुजरात के गिर वन क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में 12 शेरों की मौत और मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में अप्रैल से अब तक 10 बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। दोनों राज्यों में मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की आशंका जताई जा रही है, हालांकि गुजरात वन विभाग ने अभी तक अंतिम लैब रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। दूसरी ओर, कान्हा में बाघों की मौत का मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।

गिर में 30 से अधिक शेर निगरानी में

गुजरात के पूर्वी और पश्चिमी गिर क्षेत्र में संक्रमण की आशंका के बाद 30 से अधिक शेरों को विभिन्न एनिमल केयर सेंटरों में निगरानी और उपचार के लिए रखा गया है। वन विभाग ने प्रभावित इलाकों में शेरों को आइसोलेशन में रखने, स्वास्थ्य जांच और निगरानी बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं।

हाल के दिनों में कई शावकों और वयस्क शेरों की मौत के बाद विसरा नमूनों की जांच कराई गई, लेकिन अंतिम रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी वजह से वन विभाग की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

CDV और बेबेसिया संक्रमण की आशंका

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विशेषज्ञों को आशंका है कि इस बार भी 2018 जैसी स्थिति बन सकती है, जब CDV और बेबेसिया संक्रमण के संयुक्त प्रभाव से गिर में 11 शेरों की मौत हुई थी। हालिया घटनाओं में भी कई मृत शेरों में इसी तरह के लक्षण पाए जाने की जानकारी सामने आई है।हालांकि वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद कहा है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और पिछले तीन दिनों में किसी नए शेर की मौत दर्ज नहीं हुई है।

कान्हा में बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त

मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि अप्रैल से अब तक 10 बाघों की मौत हुई है और संक्रमण रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।इससे पहले अप्रैल में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत ने वन विभाग को अलर्ट कर दिया था। प्रारंभिक जांच में श्वसन तंत्र में गंभीर संक्रमण और CDV की आशंका सामने आई थी।

100 से अधिक बाघों पर विशेष निगरानी

CDV के खतरे को देखते हुए कान्हा में 100 से अधिक बाघों को विशेष निगरानी सूची में रखा गया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की विशेषज्ञ टीम ने आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों और बिल्लियों की वैज्ञानिक जांच की सिफारिश की है, क्योंकि यही जानवर वायरस के प्रमुख वाहक माने जाते हैं।वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, संक्रमित इलाकों को सीमित करने और आसपास के गांवों में कुत्तों के टीकाकरण जैसे कदम भी उठाए हैं।

क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV)?

CDV एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो सामान्यतः कुत्तों और अन्य मांसाहारी जीवों को प्रभावित करती है। यह वायरस श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। संक्रमित जानवरों के संपर्क, शरीर के स्राव या दूषित वस्तुओं के माध्यम से इसका प्रसार हो सकता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, आवारा कुत्ते अक्सर इस वायरस को जंगल के बड़े शिकारी जीवों तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।

 

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