gujarat stamp duty relief middle class 2025: क्या है नई घोषणा?
राज्य के रेवन्यू डिपार्टमेंट द्वारा संशोधित स्टाम्प एक्ट के तहत अब जो शुल्क देय होता था, उसमें बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि केवल मूल शुल्क का 20 प्रतिशत ही वसूला जाए, जबकि बाकी 80 प्रतिशत को माफ किया जाएगा।सीएम ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि
"समितियों, संघों और गैर-व्यापारिक निगमों द्वारा ट्रांसफर किए गए आवंटन पत्रों और शेयर सर्टिफिकेट्स पर लागू 100 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क में से अब केवल 20 प्रतिशत लिया जाएगा।"यह छूट गुजरात स्टाम्प अधिनियम, 1958 की धारा 9(ए) के तहत दी गई है।
स्टाम्प एक्ट में क्या हुए बदलाव?
हाल ही में स्टाम्प एक्ट में कई नए प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
? 1 करोड़ तक के कर्ज पर अधिकतम ₹5000 स्टाम्प शुल्क
अब यदि कोई व्यक्ति बैंक या संस्था से 1 करोड़ तक का कर्ज लेता है, तो अधिकतम स्टाम्प शुल्क केवल ₹5,000 तक सीमित होगा।? मृतक पुत्री के उत्तराधिकारियों के लिए विशेष राहत
यदि किसी मृतक बेटी के उत्तराधिकारी पैतृक संपत्ति में दावा करते हैं, तो अब वे केवल ₹200 स्टाम्प शुल्क देकर दस्तावेज़ सुधारवा सकते हैं।? स्टाम्प चोरी पर सख्त नियम
यदि स्टाम्प शुल्क चोरी का मामला पकड़ा गया, तो हर महीने 3% ब्याज दर से जुर्माना लगेगा, और यह कुल राशि देय शुल्क का छह गुना तक हो सकता है।मिडिल क्लास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ये फैसला?
आवासीय संपत्ति खरीदने वाले लाखों मध्यमवर्गीय लोगों को अब मकान खरीदते समय भारी स्टाम्प ड्यूटी नहीं चुकानी पड़ेगी। हाउसिंग सोसाइटीज, एनजीओ और कोऑपरेटिव यूनियन के लिए यह राहत उनकी वित्तीय योजनाओं को आसान बनाएगी। महिलाओं और मृतक की संतानों को उत्तराधिकार प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल हो गई है।मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने साफ कहा कि:
“राज्य सरकार का प्रयास है कि जनता पर अनावश्यक वित्तीय बोझ न पड़े, और हम हर स्तर पर प्रशासन को जनकल्याणकारी बनाए रखें।”उनके नेतृत्व में गुजरात सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है जो विकास और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देते हैं।
इसका प्रभाव क्या होगा?
- रियल एस्टेट मार्केट को नया बूस्ट मिलेगा
- किफायती हाउसिंग में तेजी आएगी
- पेपरवर्क और दस्तावेज़ प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी
बचत का बेहतर इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा
गुजरात सरकार द्वारा स्टाम्प ड्यूटी में की गई ये छूट वास्तव में एक साहसिक और संवेदनशील कदम है। यह सिर्फ आर्थिक राहत नहीं, बल्कि सरकारी दृष्टिकोण में एक बदलाव का संकेत भी है, जहां आम आदमी की ज़रूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है।