एक अर्थशास्त्री की ऐतिहासिक वापसी

कई बार कुछ फैसले वक्त से आगे होते हैं और उन्हें लेने वाले लोग इतिहास के पन्नों में धीरे-धीरे चमकने लगते हैं। उर्जित पटेल ऐसे ही शख्स हैं। 2016 में जब उन्होंने RBI के गवर्नर की कुर्सी संभाली, तो देश आर्थिक बदलाव के द्वार पर खड़ा था। और जब उन्होंने 2018 में निजी कारणों से इस्तीफा दिया, तो बहुतों ने यही सोचा अब क्या? अब, 2025 में उन्होंने एक नई, लेकिन कहीं ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी संभाली है – IMF (International Monetary Fund) में Executive Director के रूप में।
IMF में नई भूमिका: भारत की आवाज़ को मिलेगा मंच
उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में Executive Director नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल अगले तीन साल का होगा।
अब वे IMF के बोर्ड में भारत और कुछ अन्य देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह सिर्फ एक औपचारिक पोस्ट नहीं है यह विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की सोच को रखने की जिम्मेदारी है।
वे निम्नलिखित मुख्य जिम्मेदारियां निभाएंगे
- IMF के नीतिगत फैसलों और आर्थिक सहायता प्रस्तावों में भागीदारी
- सदस्य देशों की आर्थिक नीतियों की समीक्षा
- भारत और जुड़े देशों के हितों की रक्षा और प्रस्तुति
- वैश्विक मौद्रिक स्थिरता के लिए योगदान
- कैपेसिटी डेवलपमेंट के जरिए देशों की नीति क्षमताओं को मजबूत करना
उर्जित पटेल: एक आर्थिक सोच के निर्माता
आपको याद होगा जब महंगाई बेकाबू लग रही थी, तब सरकार ने एक स्थिर और स्पष्ट लक्ष्य तय किया:
CPI आधारित 4% का महंगाई टारगेट
इस नीति की नींव रखने वाले व्यक्ति थे उर्जित पटेल। उनकी अगुवाई में बनी रिपोर्ट के आधार पर भारतीय मुद्रास्फीति लक्ष्य फ्रेमवर्क तैयार हुआ। इसने भारत की आर्थिक विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती दी।
उनका काम न सिर्फ तकनीकी तौर पर ठोस था, बल्कि यह आम जनता के जीवन पर भी असर डालता है जब सब्ज़ियों, ईंधन, और दवाओं की कीमतों को स्थिर रखने में नीतियों की भूमिका होती है।
IMF और भारत: बदलते समीकरण में बड़ी भूमिका
भारत अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं रहा, वह वैश्विक आर्थिक बहसों में एक निर्णायक आवाज़ बन चुका है। ऐसे में उर्जित पटेल की नियुक्ति का मतलब है कि IMF में भारत की बात आर्थिक तर्क और ठोस नीति सोच के साथ रखी जाएगी विकासशील देशों की चुनौतियों को वास्तविक अनुभवों के आधार पर रखा जाएगा भारत की वित्तीय सूझबूझ को ग्लोबल इक्वेशन में शामिल किया जाएगा

एक लंबा सफर, जहां अनुभव बना ताकत
उर्जित पटेल का IMF से नाता नया नहीं है। 1992 में वे IMF के भारत स्थित Deputy Resident Representative रहे। फिर उन्होंने RBI में Deputy Governor के रूप में सेवा दी। इसके बाद RBI के 24वें गवर्नर बने। और फिर, रिलायंस, IDFC, MCX जैसी कंपनियों में भी रणनीतिक भूमिकाएं निभाईं। उनकी विशेषज्ञता सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि नीतियों को ज़मीन पर उतारने में है।
भारत की नीतिगत सोच को मिला अंतरराष्ट्रीय कंधा
उर्जित पटेल की IMF में नियुक्ति सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है। यह उस भारत की जीत है, जो अब दुनिया को सिर्फ उपभोक्ता नहीं, नीति-निर्माता के रूप में दिख रहा है। आज, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई, ब्याज दरों और युद्ध जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब उर्जित पटेल जैसे नीति-विशेषज्ञ की भूमिका कम शब्दों, ज्यादा असर वाली होगी।
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