देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षण संस्थानों के संचालन में निर्धारित नियमों और मानकों की अनदेखी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षण संस्थान को आवश्यक मान्यता और निर्धारित नियमों का पालन किए बिना मनमाने ढंग से संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसी क्रम में उधमसिंह नगर के बाजपुर परगना क्षेत्र में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पांच और मदरसों को सील कर दिया।
पांच मदरसों पर प्रशासन की कार्रवाई
प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई में इन पांच संस्थानों को सील किया गया—
मदरसा गुलशन इस्लाम, कनोरा-बाजपुर
मदरसा जामिया हनकिया रजा उल उलूम, चकरपुर
मदरसा जामिया फातिमा जेहरा, जगन्नाथपुर-बाजपुर
मदरसा मोईनुल उलूम, मोहल्ला गांधीनगर, केलखेड़ा
मदरसा हुज्जतुल इस्लाम, गुमसानी रोड, बाजपुर
प्रशासन के अनुसार, इन संस्थानों के संचालन से जुड़े आवश्यक मान्यता, नियमों और निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई।
नियमों के मुताबिक संचालन पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेश में पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही है। सरकार का कहना है कि सभी शिक्षण संस्थानों को निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों के अनुसार संचालित किया जाना जरूरी है। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और निर्धारित शैक्षणिक मानकों के अनुरूप वातावरण उपलब्ध कराना है। इसी वजह से नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जा रही है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
बाजपुर क्षेत्र में इससे पहले भी ऐसे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, जो निर्धारित नियमों या आवश्यक मानकों के अनुरूप संचालित नहीं पाए गए थे। प्रशासन की ओर से क्षेत्र में संचालित अन्य शिक्षण संस्थानों की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान यदि कोई अन्य संस्था निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करती हुई पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने साफ किया रुख
धामी सरकार का कहना है कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को नियमों और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किया जाना जरूरी है। किसी भी संस्था को नियमों की अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।बाजपुर में पांच और मदरसों को सील किए जाने की कार्रवाई को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। अब प्रशासन की जांच आगे किन संस्थानों तक पहुंचती है, इस पर नजर बनी हुई है।