12,800 फीट पर दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ को संरक्षित करने के लिए अब वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। करीब 1000 साल पुराने इस मंदिर में संरचनात्मक झुकाव के संकेत मिलने के बाद केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की ने संरक्षण कार्य शुरू कर दिया है।
पत्थर-दर-पत्थर मंदिर को खोलकर अध्ययन
तुंगनाथ मंदिर की मूल वास्तुकला और धार्मिक स्वरूप से बिना छेड़छाड़ किए इसे मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञ पत्थर-दर-पत्थर मंदिर को खोलकर अध्ययन करेंगे और फिर उसी क्रम में दोबारा स्थापित किए जाएंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक समय, अत्यधिक बर्फबारी, भूकंपीय गतिविधियों और चट्टानों के खिसकने के कारण मंदिर की संरचना में झुकाव के संकेत मिले हैं।
10 डिग्री तक झुकाव का उल्लेख
CBRI के अनुसार मंदिर में करीब ढाई डिग्री झुकाव की जानकारी दी गई थी, जबकि पहले की ASI रिपोर्ट में मुख्य मंदिर में 5 से 6 डिग्री और परिसर की कुछ छोटी संरचनाओं में 10 डिग्री तक झुकाव का उल्लेख किया गया। इसी के बाद तुंगनाथ मंदिर के वैज्ञानिक संरक्षण की योजना तैयार की गई। बता दे मंदिर को पत्थर-दर-पत्थर खोला जाएगा। हर पत्थर की यूनिक कोडिंग होगी, ताकि रिकॉर्ड रहे कि वह किस जगह से निकाला गया है। बाद में उसी क्रम और उसी स्थान पर उसे दोबारा लगाया जाएगा।