रीवा में ‘खाट पर सिस्टम’: एंबुलेंस नहीं मिली, आदिवासी महिला को 2 किमी खाट पर ढोया; इलाज से पहले मौत

मध्य प्रदेश त्रासदी

रीवा में ‘खाट पर सिस्टम’: एंबुलेंस नहीं मिली, आदिवासी महिला को 2 किमी खाट पर ढोया; इलाज से पहले मौत

मध्य प्रदेश के रीवा में एक आदिवासी महिला की मौत ने स्वास्थ्य व आपातकालीन सेवाओं की पोल खोली। सड़क अव्यवस्था के कारण समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली।

रीवा में ‘खाट पर सिस्टम’ एंबुलेंस नहीं मिली आदिवासी महिला को 2 किमी खाट पर ढोया इलाज से पहले मौत

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। मनगवां विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नदना के डिहिया गांव में आकाशीय बिजली गिरने से गंभीर रूप से घायल हुई आदिवासी महिला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी। मजबूरी में परिजनों ने महिला को खाट पर लिटाकर करीब दो किलोमीटर तक पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

पहले ही रामकली ने रास्ते में दम तोड़ दिया

मृतका की पहचान रामकली रावत के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उन्होंने आपातकालीन एंबुलेंस सेवा को सूचना दी थी, लेकिन गांव तक जाने वाली सड़क कीचड़ और गड्ढों से इतनी खराब थी कि एंबुलेंस गांव के अंदर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने खाट को ही स्ट्रेचर बनाया और घायल महिला को कंधों पर उठाकर मुख्य मार्ग तक ले जाने का प्रयास किया। हालांकि इलाज मिलने से पहले ही रामकली ने रास्ते में दम तोड़ दिया।

5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत

इस घटना के बाद ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसी सड़क के निर्माण के लिए विधायक निधि से 5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन आज तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि स्वीकृत राशि का उपयोग आखिर कहां हुआ और सड़क निर्माण का कार्य क्यों अधूरा पड़ा है।

घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश

घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क समय पर बन जाती और एंबुलेंस गांव तक पहुंच पाती, तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क निर्माण और आपातकालीन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े

वहीं, विपक्ष ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों और संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सड़क निर्माण की जांच तथा स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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