Jaiselmer Godawan Chicks Born: राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर में आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (कृत्रिम गर्भाधान) की आधुनिक तकनीक से दो गोडावण चूजों का जन्म हुआ है। एक चूजे का जन्म जंगल से लाए गए अंडे से हुआ है। इस सफलता से गोडावण संरक्षण को नई उम्मीद मिली है।
आर्टिफिशियल तकनीक से चूजे का हुआ जन्म
वन विभाग के अनुसार, इस बार ब्रीडिंग सेंटर पर कुल तीन गोडावण चूजों का जन्म हुआ है। इनमें से दो चूजे कृत्रिम गर्भाधान और वैज्ञानिक हैचिंग प्रक्रिया से पैदा हुए, जबकि एक चूजा जंगल से सुरक्षित रूप से लाए गए अंडे से निकला। ब्रीडिंग सीजन अभी भी जारी है, ऐसे में और चूजों के जन्म की संभावना है।

2018 से चल रहा विशेष संरक्षण कार्यक्रम
गोडावण संरक्षण के लिए साल 2018 से विशेष प्रजनन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। डेजर्ट नेशनल पार्क अंतर्गत सम के सुदासरी और रामदेवरा में दो ब्रीडिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, जहां विशेषज्ञ टीम 24 घंटे निगरानी रखकर वैज्ञानिक तरीके से चूजों का पालन-पोषण कर रही है।
आनुवंशिक विविधता बढ़ाने पर जोर
जंगल से अंडे लाकर उन्हें सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि गोडावण की आनुवंशिक विविधता बढ़ रही है। इससे नई पीढ़ी के पक्षी अधिक स्वस्थ, मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बन रहे हैं। साथ ही शिकारियों और जंगली जानवरों से अंडों को बचाया जा रहा है।

रामदेवरा में बनेगी 64 मीटर लंबी सुरंग
पक्षियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए रामदेवरा क्षेत्र में 6.25 करोड़ रुपये की लागत से 64 मीटर लंबी अंडरपास (सुरंग) का निर्माण किया जा रहा है। इससे सड़क दुर्घटनाओं में गोडावण की मौत को रोका जा सकेगा।
DFO का बयान
डेजर्ट नेशनल पार्क के DFO बृजमोहन गुप्ता ने कहा कि- 'जैसलमेर जिले में वन विभाग और जीआईबी प्रोजेक्ट के तहत सम के सुदासरी और रामदेवरा में दो ब्रीडिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में गोडावण के प्राकृतिक प्रजनन के साथ-साथ जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडों का भी संरक्षण किया जाता है। यहां विशेषज्ञों की टीम चौबीसों घंटे निगरानी कर वैज्ञानिक तरीके से चूजों का पालन-पोषण करती है।'