महतारी वंदन योजना में बड़ी लापरवाही, पुरुष के खाते में सालभर पहुंचती रही राशि; प...

छत्तीसगढ़ योजना घोटाला

महतारी वंदन योजना में बड़ी लापरवाही, पुरुष के खाते में सालभर पहुंचती रही राशि; पति के नाम में भी खुद का नाम दर्ज

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के तहत एक पुरुष को आर्थिक लाभ मिलने का मामला सामने आया है, जिसमें विभागीय जांच में बड़ी खामियां उजागर हुई हैं।

महतारी वंदन योजना में बड़ी लापरवाही पुरुष के खाते में सालभर पहुंचती रही राशि पति के नाम में भी खुद का नाम दर्ज

छत्तीसगढ़ की महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई महतारी वंदन योजना में खैरागढ़ जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ग्राम मुढ़ीपार में एक पुरुष के खाते में करीब एक साल तक योजना की राशि पहुंचती रही। सबसे बड़ी बात यह रही कि आवेदन में हितग्राही का नाम और पति का नाम दोनों एक ही व्यक्ति का दर्ज था, फिर भी ऑनलाइन सिस्टम और विभागीय जांच में यह गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई।

सुपरवाइजर स्तर से सत्यापित होकर आगे बढ़ गया

मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू का आवेदन महतारी वंदन योजना में दर्ज हुआ था। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आवेदन सार्वजनिक पोर्टल के माध्यम से किया गया था। आवेदन में हितग्राही के रूप में तिलोक साहू का नाम दर्ज था, जबकि पति के नाम वाले कॉलम में भी तिलोक साहू ही लिखा हुआ था। इसके बावजूद आवेदन पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और फिर सुपरवाइजर स्तर से सत्यापित होकर आगे बढ़ गया।

महतारी वंदन योजना के नियमों के अनुसार इसका लाभ केवल पात्र महिलाओं को दिया जाना है। ऐसे में एक पुरुष का आवेदन दो स्तर की जांच प्रक्रिया से गुजरकर स्वीकृत होना विभागीय सत्यापन प्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सामान्य जांच में भी यह गलती आसानी से पकड़ी जा सकती थी।

लाभ त्याग का अनुरोध भी स्वीकार किया गया

ऑनलाइन रिकॉर्ड के मुताबिक संबंधित खाते में 12 महीने तक भुगतान दर्ज हुआ है। हालांकि, एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना खैरागढ़ की ओर से 3 जुलाई 2026 को बैंक को पत्र जारी कर 10 हजार रुपये शासन के खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए। मामला सामने आने के बाद आवेदन की स्थिति को परमानेंट होल्ड कर दिया गया है और लाभ त्याग का अनुरोध भी स्वीकार किया गया है।

परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित व्यक्ति से राशि की रिकवरी कर ली गई है। वहीं तिलोक साहू ने बताया कि वह सीएससी सेंटर संचालित करता है और योजना की प्रक्रिया समझने के लिए शुरुआती दौर में ट्रायल के तौर पर आवेदन किया था। उनके अनुसार खाते में आई 10 हजार रुपये की राशि वापस जमा करा दी गई है।

कर्मचारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आवेदन में इतनी स्पष्ट गलती थी, तो सत्यापन करने वाले कर्मचारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी। राशि की रिकवरी के बाद भी यह मामला सरकारी योजनाओं की निगरानी और जांच प्रक्रिया की मजबूती पर सवाल खड़े कर रहा है।

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