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MidDayMeal: बनासकांठा में मिड-डे मील कर्मचारियों ने सेंट्रल किचन का विरोध कर स्कूल में ही ताजा भोजन बनाने की उठाई मांग

By : divya mistry
MidDayMeal: बनासकांठा में मिड-डे मील कर्मचारियों ने सेंट्रल किचन का विरोध कर स्कूल में ही ताजा भोजन बनाने की उठाई मांग
MidDayMeal: बनासकांठा जिले में मिड-डे मील (मध्यान भोजन) कर्मचारियों ने अपने अधिकारों और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की है। मंगलवार को जिले के मिड-डे मील कर्मचारियों ने बनासकांठा कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने केंद्रीय रसोई (सेंट्रल किचन) प्रोजेक्ट का विरोध जताया और स्कूलों में ही भोजन बनाने की मांग की। [caption id="attachment_92121" align="alignnone" width="300"]MidDayMeal MidDayMeal[/caption]

MidDayMeal: अपनी छह प्रमुख मांगों को सामने रखा

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की पोषण शक्ति निर्माण योजना और गुजरात सरकार की मुख्यमंत्री अल्पाहार योजना के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, ताजा और पोषक भोजन देना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने अपनी छह प्रमुख मांगों को सामने रखा।

MidDayMeal: पोषण घटने की आशंका बनी रहती

उनका तर्क है कि अगर केंद्रीय रसोई से भोजन लाकर स्कूलों में वितरित किया जाता है, तो बच्चों तक वह भोजन 12 से 14 घंटे पुराने हाल में ही पहुंचेगा, जो स्वास्थ्य के लिहाज से उचित नहीं है। कर्मचारियों ने बताया कि केंद्रीय रसोई में रात 3 बजे खाना तैयार किया जाता है, जबकि बच्चों को यह भोजन अगले दिन दोपहर करीब 2 बजे परोसा जाता है। इस दौरान भोजन की ताजगी और पोषण घटने की आशंका बनी रहती है।

MidDayMeal: वर्तमान रसोइयों की नौकरी पर संकट आ जाएगा

बनासकांठा मध्यान भोजन कर्मचारी संघ ने कहा कि स्कूलों में ताजा भोजन बनने से न केवल बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि हजारों मिड-डे मील कर्मचारियों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि केंद्रीय रसोई प्रोजेक्ट लागू होता है, तो बड़ी संख्या में वर्तमान रसोइयों की नौकरी पर संकट आ जाएगा।

वर्तमान व्यवस्था को बरकरार रखा जाए

कर्मचारियों ने मांग की कि सरकार उनकी बात पर गंभीरता से विचार करे और बच्चों के हित और कर्मचारियों के रोजगार को देखते हुए स्कूल में ही भोजन पकाने की वर्तमान व्यवस्था को बरकरार रखा जाए।

भोजन तैयार करना ही सबसे बेहतर विकल्प

MidDayMeal: ज्ञापन में उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और ताजगी को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भोजन तैयार करना ही सबसे बेहतर विकल्प है। कलेक्टर कार्यालय से ज्ञापन प्राप्त कर अधिकारियों ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को राज्य सरकार तक पहुँचाया जाएगा और उचित कदम उठाए जाएंगे। इस विरोध से साफ है कि केंद्रीय रसोई योजना को लेकर कर्मचारियों में भारी असंतोष है और वे इसके खिलाफ संगठित होकर अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। गुजरात, बनासकांठा। संवाददाता मोहन भाटिया।

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