Karila Dham Temple: माता सीता का ऐसा मंदिर जहां लव - कुश का हुआ था जन्म!

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Karila Dham Temple: माता सीता का ऐसा मंदिर जहां लव - कुश का हुआ था जन्म!

karila dham temple माता सीता का ऐसा मंदिर जहां लव - कुश का हुआ था जन्म

Karila Dham Temple: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 165 किलोमीटर दूर अशोकनगर जिले में पहाड़ी पर स्थित करीला धाम का मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर की अनोखी बात यह है कि ये एक मात्र ऐसा मंदिर हैं जहां सीता माता बिना भगवान राम के विराजमान हैं। यहां सिर्फ माता सीता की पूजा होती है। Read More: श्री दूल्हा महाराज का अद्भुत मंदिर, चमत्कारिक घटनाओं के लिए है प्रसिद्ध! यहां सीता माता के साथ लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि की मूर्तियां भी विराजमान हैं। बताया जाता हैं कि लव-कुश का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। हर साल रंगपंचमी के मौके पर करीला धाम में विशाल मेले का आयोजन किया जाता हैं। इस मेले में दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु मां जानकी के दरबार में दर्शन करने के लिए आते हैं।

बिना पति के विराजमान माता सीता

कहा जाता है दुनिया में जितने भी भगवान राम के मंदिर हैं, सभी जगह भगवान राम के साथ माता सीता,लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं परंतु यह पूरी दनिया में यह एक ऐसा मंदिर हैं जहां माता सीता बिना अपने स्वामी के विराजमान हैं। मान्यता है कि रामायण काल के दौरान जब भगवान राम रावण का वध करके अयोध्या आए तो सीता माता के चरित्र पर सभी ने बहुत उंगलियां उठाई थी। जिसके बाद भगवान राम ने माता सीता का त्याग कर दिया था। तब माता सीता ने करीला पहाड़ी पर स्थित महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शरण ली थीं। यहीं पर उन्होंने लव-कुश को जन्म दिया था। तभी से इस स्थान पर रंगपंचमी के मौके पर मेला लगता हैं और पहाड़ी पर स्थित महर्षि वाल्मीकि की गुफा खोली जाती है। उस समय देश के हर कोने से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं।

 करीला धाम में इस नृत्य का है विशेष महत्व

रामायण के अनुसार बताया जाता है कि रंगपंचमी के दिन करीला गांव में स्थित वाल्मीकि आश्रम में लव-कुश का जन्म हुआ था। महर्षि वाल्मीकि ने बड़े धूमधाम से उनका जन्मदिन मनाया था। इस उत्सव में बेड़नियां जाति की हजारों नृत्यांगनाएं जमकर नाची थीं। तब से हर साल रंगपंचमी के दिन मेला लगता है और लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता सीता,लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि के दर्शन करने आते है।

मन्नत पूरी होते ही करते है सब ये काम!

प्राचीन परंपरा के अनुसार, करीला धाम में जो भी मन्नत मांगते हैं वह पूरी हो जाती है। मन्नत पूरी होने के बाद, लोग राई नृत्य करवाते हैं। कहा जाता है कि यहां नि:संतान दंपत्ति की झोली माता सीता भर देती हैं। इसके बाद लोग राई नृत्य करवाते हैं।

इस मंदिर में सांस्कृति से हैं विशेष से जुड़े

करीला धाम सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है। रंगपंचमी के अवसर पर आयोजित मेला और राई नृत्य परंपरा इस स्थल को और भी खास बनाती हैं। यह मंदिर न सिर्फ माता सीता के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यहां की सांस्कृतिक धरोहर, जुड़ी कहानियां भी लाखों लोगों को आकर्षित करती है।

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