‘यह चूक नहीं, राष्ट्रीय अन्याय’: असम से लौटे झारखण्ड सीएम सोरेन के बीजेपी पर तीखे वार जारी

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‘यह चूक नहीं, राष्ट्रीय अन्याय’: असम से लौटे झारखण्ड सीएम सोरेन के बीजेपी पर तीखे वार जारी

‘यह चूक नहीं राष्ट्रीय अन्याय’ असम से लौटे झारखण्ड सीएम सोरेन के बीजेपी पर तीखे वार जारी

Jharkhand politics: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम से लौटने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी पर अपने तीखे हमले जारी रखे हैं। 10 दिनों तक असम में चुनावी प्रचार करने के बाद रांची लौटे सीएम सोरेन ने आदिवासी मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को गुरुवार को कठघरे में खड़ा किया है।

सीएम सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए असम के चाय बागानों में रह रहे आदिवासी समुदाय की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए और इसे “राष्ट्रीय स्तर का अन्याय” बताया।

[caption id="attachment_144158" align="alignnone" width="1200"]झारखण्ड सीएम सोरेन झारखण्ड सीएम सोरेन[/caption]

आदिवासियों की अनदेखी पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा कि आदिवासी समुदाय ने कभी भी अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया और सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्यों वही आदिवासी आज अपने ही देश में पहचान और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सोरेन ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रश्न नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की वास्तविक तस्वीर है।

सीएम सोरेन ने दिया इतिहास और संघर्ष का हवाला

हेमंत सोरेन ने संथाल हुल और भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन समुदायों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्णायक लड़ाइयाँ लड़ीं, वही आज संविधान के दायरे में भी अपने हक के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने इसे विडंबना बताते हुए कहा कि दशकों में सरकारें बदलीं, लेकिन आदिवासियों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

पोस्टर के जरिए मांगा समर्थन

सीएम सोरेन ने अपनी पोस्ट के साथ तीन पोस्टर भी साझा किए, जिनमें हिंदी, असमिया और अंग्रेजी में आदिवासी समुदाय से अपील की गई है। उन्होंने चाय बागानों में रहने वाले आदिवासियों से अपनी पार्टी के पक्ष में मतदान करने का आह्वान किया। पोस्ट में उन्होंने ST दर्जा, न्यूनतम 500 रुपये मजदूरी, शिक्षा, आवास और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी।

‘यह चूक नहीं, अन्याय है’

सीएम सोरेन ने कहा कि असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समुदाय को आज तक अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा नहीं मिलना एक गंभीर अन्याय है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “यह कोई साधारण चूक नहीं, बल्कि ऐसा अन्याय है जिसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।”

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