अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साफ कहा कि ईरान की ओर से भेजा गया जवाब “स्वीकार्य नहीं” है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है।
अमेरिका ने ईरान के सामने क्या शर्त रखी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इस सप्ताह ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इसमें सबसे बड़ी शर्त यह थी कि ईरान अगले 12 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन नहीं करेगा।इसके अलावा ईरान को अपने पास मौजूद करीब 60% तक समृद्ध 440 किलो एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। बदले में अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को रिलीज करने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने को तैयार था।लेकिन ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका जवाब “सकारात्मक और व्यावहारिक” था और अब फैसला अमेरिका को करना है।
तेल बाजार में हलचल, ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर के पार
अमेरिका द्वारा प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ा असर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। अगर यहां सैन्य तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ सकता है।अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 3% उछलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। इसका असर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्यों बढ़ रही चिंता?
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका, फ्रांस या ब्रिटेन ने होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य दखल बढ़ाया तो उसका “कड़ा जवाब” दिया जाएगा।अमेरिकी दावों के मुताबिक, क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया है। कतर, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के जहाजों पर हमले और रुकावट की खबरें भी सामने आई हैं।होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक विवाद
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क केली ने दावा किया कि ईरान संघर्ष के कारण अमेरिका का हथियार भंडार तेजी से कम हो रहा है।हालांकि अमेरिकी रक्षामंत्री पीट हेगसेथ ने इन दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सैन्य क्षमता मजबूत है और गलत जानकारी फैलाई जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बाजार, तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।