ट्रम्प के प्रस्ताव पर चुप ईरान, बोला- मिसाइलें तैयार; अमेरिका में बढ़ी टेंशन

Iran Warns US Over Hormuz Tensions

ट्रम्प के प्रस्ताव पर चुप ईरान, बोला- मिसाइलें तैयार; अमेरिका में बढ़ी टेंशन

ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी। होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ा, ट्रम्प के 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तेहरान ने क्या कहा?

ट्रम्प के प्रस्ताव पर चुप ईरान बोला- मिसाइलें तैयार अमेरिका में बढ़ी टेंशन

AI इमेज |

तेल अवीव, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ चेतावनी दी है कि अगर फारस की खाड़ी या होर्मुज स्ट्रेट में उसके तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर सीधा हमला किया जाएगा।

इसी बीच अमेरिका द्वारा तैयार किए गए 14-पॉइंट प्रस्ताव पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद जताई थी कि ईरान शनिवार तक जवाब देगा, लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी अमेरिकी समयसीमा के दबाव में फैसला नहीं करेगा। बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर भी दिखने लगा है।

IRGC की धमकी- अमेरिकी जहाज पहले से निशाने पर

IRGC की नौसेना कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरानी जहाजों पर किसी भी नए हमले का जवाब सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दिया जाएगा।इसके बाद IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया कि उसकी मिसाइलें और ड्रोन पहले ही अमेरिकी जहाजों और बेस पर “लॉक” हो चुके हैं और अब सिर्फ आदेश का इंतजार है। इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और बढ़ गया है।

ट्रम्प का 14-पॉइंट प्रस्ताव क्या है?

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने 14-पॉइंट का एक ड्राफ्ट रखा है। माना जा रहा है कि इसमें होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा, सीजफायर, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर शर्तें शामिल हैं।हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि प्रस्ताव अभी समीक्षा के दौर में है और अंतिम फैसला ईरान अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से करेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्रक्रिया में संसद, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, IRGC और सुप्रीम लीडर की मंजूरी शामिल है।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों बना दुनिया की चिंता?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर संकट और बढ़ता है तो भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों में पेट्रोल, डीजल, गैस और आयातित सामान महंगे हो सकते हैं।

ब्रिटेन और फ्रांस ने भी बढ़ाई सैन्य मौजूदगी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ब्रिटेन ने अपना युद्धपोत HMS Dragon पश्चिम एशिया भेजने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।फ्रांस भी पहले ही अपना कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिणी लाल सागर में तैनात कर चुका है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिमी देश अब इस संकट को सिर्फ क्षेत्रीय विवाद नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के खतरे के रूप में देख रहे हैं।

रूस ने दिया बड़ा संकेत

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि मॉस्को ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को अपने यहां सुरक्षित रखने के लिए तैयार है। उन्होंने याद दिलाया कि 2015 में भी रूस ने ऐसा किया था।पुतिन के बयान को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में रूस की सक्रिय भूमिका के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह भी साफ हुआ कि मॉस्को पश्चिम एशिया संकट में अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहता है।

लेबनान में इजराइली हमले तेज, 39 मौतें

दक्षिणी लेबनान में इजराइल के हवाई और ड्रोन हमलों में एक दिन में 39 लोगों की मौत की खबर है। कई रिहायशी इमारतें निशाना बनीं। वहीं हिजबुल्लाह ने भी इजराइल पर ड्रोन और रॉकेट हमलों का दावा किया है।तेल अवीव में प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने युद्ध और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए। कुछ लोग “Stop the Genocide” जैसे पोस्टर लिए नजर आए।

खाड़ी में फंसे हजारों नाविकों पर बढ़ा खतरा

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में करीब 20 हजार नाविक पिछले दो महीने से फंसे हुए हैं। लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे के कारण उनमें मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है।रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक कम से कम 11 नाविकों की मौत हो चुकी है। कई जहाजों के कर्मचारियों ने बताया कि वे लगातार आसमान में ड्रोन और मिसाइलें उड़ते देख रहे हैं, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

 

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