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चमोली का नंदानगरः डर के चलते 34 परिवारों ने छोड़े घर, बाजार खाली 

By : Shital Sharma
चमोली का नंदानगरः डर के चलते 34 परिवारों ने छोड़े घर, बाजार खाली 

 जोशीमठ के बाद अब चमोली का नंदानगर जमीन में समा रहा है!

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दो साल पहले जोशीमठ की तबाही ने पूरे देश को हिला दिया था। अब उसी तरह की दर्दनाक कहानी चमोली जिले के नंदानगर की हो रही है। पिछले हफ्ते हुई भारी बारिश और भूस्खलन ने इस कस्बे की नींव हिला दी है। शुक्रवार की रात अचानक हालात बिगड़े, और 8 मकान धराशायी हो गए। प्रशासन ने 34 परिवारों को उनके घरों से निकाल दिया है, और बाजार की 40 दुकानें भी खाली कराई गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि "पूरी जिंदगी की कमाई से बनाए गए घर और दुकानें अब मलबे में तब्दील हो रही हैं।"

नंदानगर की तबाही: 8 मकान ढहे, 16 घर खतरे में

नंदानगर के लक्ष्मी मार्केट और बैंड बाजार इलाकों में दरारें दिखाई देने लगी थीं। प्रशासन ने DDRF की टीमों को भेजकर 64 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। लेकिन सबसे बड़ा खतरा एक विशाल चट्टान का है, जो बाजार के ऊपर से खिसक रही है। स्थानीय लोग कहते हैं, "अगर यह चट्टान टूटी, तो 150 दुकानें मलबे में तब्दील हो जाएंगी।"

नंदन सिंह बिष्ट, नंदानगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष, कहते हैं....

"सबसे बड़ा डर उस चट्टान का है, जो बाजार के ठीक ऊपर से खिसक रही है। अगर अगले कुछ दिनों में बारिश हुई, तो यह चट्टान गिर सकती है।"

 49 साल पहले की चेतावनी अनसुनी रही

1976 में गढ़वाल कमिश्नर एमसी मिश्रा की कमेटी ने जोशीमठ को लेकर चेतावनी दी थी कि यह इलाका "हाई रिस्क जोन-5" में आता है। यह शहर पहाड़ों से नीचे आए मलबे के ढेर (मोरेन) पर बसा है, जिसकी मिट्टी बहुत कमजोर है। लेकिन इस चेतावनी को अनसुना कर दिया गया।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने 2 साल पहले केंद्र को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि जोशीमठ में खराब वाटर ड्रेनेज सिस्टम, ढलानों पर निर्माण, और भारी निर्माण कार्य जमीन को खोखला कर रहे हैं। लेकिन कुछ नहीं बदला।

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नंदानगर भी इसी तरह की तबाही का शिकार हो रहा है। भूस्खलन और बारिश ने इस कस्बे की नींव हिला दी है।

लोगों का दर्द: पूरी जिंदगी की कमाई बर्बाद हो गई

नंदानगर के व्यापारियों का कहना है:

"हमने पूरी जिंदगी की कमाई से ये घर और दुकानें बनाई थीं। अब सब कुछ बर्बाद हो रहा है। सरकार ने हमें राहत शिविरों में भेजा है, लेकिन हमारा सब कुछ यहाँ छूट गया है।"

DDRF की टीमों ने 64 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है, लेकिन लोगों के दिलों में डर बैठ गया है। वे नहीं जानते कि अगले कुछ दिनों में क्या होगा।

प्रशासन की कार्रवाई: रेड अलर्ट और राहत कार्य

प्रशासन ने 5 दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। भूस्खलन को रोकने के लिए बारिश के पानी को सुरक्षित नाले में छोड़ा जा रहा है। लेकिन लोगों का डर अभी भी बना हुआ है।

जोशीमठ की तरह, यहाँ भी लोगों को उम्मीद है कि सरकार स्थायी समाधान निकालेगी। लेकिन अभी तो बस राहत शिविरों में रहने के अलावा कोई चारा नहीं है।

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पहाड़ों की तबाही कब थमेगी?

जोशीमठ के बाद अब नंदानगर की तबाही ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • क्या पहाड़ों में हो रहे भारी निर्माण के कारण यह सब हो रहा है?
  • क्या सरकार और प्रशासन समय रहते कदम उठा पाएंगे?
  • क्या पहाड़ों की यह तबाही कभी थमेगी?
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