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थराली में बादल फटने से मची तबाहीः आर्मी ने संभाला मोर्चा

By : Shital Sharma
थराली में बादल फटने से मची तबाहीः आर्मी ने संभाला मोर्चा
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एक रात, जब आसमान फटा और ज़िंदगी बदल गई

उत्तराखंड की शांत और सुंदर वादियाँ अक्सर अपने सौंदर्य से लोगों को लुभाती हैं, लेकिन कभी-कभी ये पहाड़ अपने सीने में छिपे डर को बाहर निकाल देते हैं। 23 अगस्त की रात, जब देश सो रहा था, चमोली जिले के थराली कस्बे में ज़िंदगी की तस्वीर बदल रही थी। रात के 1 से 2 बजे के बीच, अचानक एक तेज़ गर्जना हुई। पहाड़ से आती तेज़ आवाज़ और भारी बारिश के बीच किसी को समझ नहीं आया कि हुआ क्या। बादल फट चुका था।

हमने सब कुछ खो दिया...

थराली के सागवाड़ा और चेपड़ों गांवों में लोगों को नींद से डर ने जगा दिया। अचानक मलबे की लहर घरों की दीवारें तोड़ती, दरवाज़े उखाड़ती हुई अंदर घुस आई। बच्चों की चीखें, बुजुर्गों की पुकार और हर तरफ भागदौड़...

एक स्थानीय निवासी रमेश ने कहा,

हमने अपने सामने अपना घर टूटते देखा। बेटी को बचाने की कोशिश की, लेकिन मलबा बहुत तेज़ था...
सागवाड़ा गांव में एक बच्ची की मलबे में दबकर मौत हो गई, और चेपड़ों में एक व्यक्ति अब भी लापता है।

80 घर मलबे से भरे, बाज़ार बर्बाद

थराली कस्बे के करीब 70-80 घरों में दो फीट तक मलबा भर गया है। छोटे-छोटे दुकानदारों की दुकानें बर्बाद हो गईं, जिनका यही एक सहारा था। कई वाहनों के ऊपर चट्टानें गिरीं, और घरों में पानी और कीचड़ भर गया।  cloudburst tharali uttarakhand flood disaster army rescue chamoli rain कर्णप्रयाग-ग्वालदम नेशनल हाईवे मिंग गधेरा के पास मलबा आने से बंद हो गया। गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया। लोगों के पास न बिजली, न नेटवर्क, और न पीने का साफ पानी।

सुबह का उजाला नहीं, सिर्फ तबाही लेकर आया

जब सूरज की रोशनी गांवों पर पड़ी, तब तक सब कुछ बदल चुका था। जहां कल बच्चे खेलते थे, वहां आज सिर्फ मलबा और खामोशी थी। कुछ औरतें मलबे में अपने जेवर और दस्तावेज़ खोज रही थीं, तो कुछ लोग पास की नदी में अपने गुम हुए जानवर ढूंढ रहे थे।

रेस्क्यू में सेना की एंट्री, 50 जवान तैनात

शनिवार सुबह भारतीय सेना के 50 जवान थराली पहुंचे। साथ ही NDRF और SDRF की टीमें भी राहत कार्य में लग गईं। गांव-गांव जाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। रास्तों से पेड़ों और पत्थरों को हटाया जा रहा है ताकि फंसे लोग बाहर आ सकें।

18 दिन में दूसरी बार फटा बादल

यह घटना केवल एक त्रासदी नहीं, बल्कि एक पैटर्न का हिस्सा है। 5 अगस्त को भी उत्तरकाशी के धराली गांव में बादल फटा था, जिसमें 5 लोगों की मौत हुई और 100 से अधिक लोग लापता हुए। मानसून के इस सीज़न में अब तक उत्तराखंड में 295 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।IMD ने अगले कुछ दिनों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि खतरा अभी टला नहीं है।

कब मिलेगा स्थायी समाधान?

इस इलाके में पहले भी बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं कि राहत सिर्फ कागज़ों में आती है। बोरी में राशन दो दिन का, लेकिन घर तो गया...,सिर्फ चुनाव के वक़्त नेता आते हैं, अब कौन आएगा हमारे घर की दीवार बनाने? इन सवालों में ग़ुस्सा नहीं, एक थका हुआ यकीन है कि शायद अगली बारिश तक कुछ नहीं बदलेगा।

प्रकृति का इशारा, लेकिन क्या हम सुन रहे हैं?

थराली की ये रात सिर्फ एक घटना नहीं, एक चेतावनी थी। मौसम का बदलता मिजाज, जलवायु परिवर्तन, और हमारी तैयारी की कमीइन तीनों ने मिलकर ये तबाही लिखी। सरकार, प्रशासन, और समाज सभी को अब सिर्फ रेस्क्यू नहीं, पूर्व तैयारी और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना होगा। थराली की मलबे में एक मासूम बच्ची की मौत हमें याद दिला रही है कि हम हर बार बचेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं। Read More :- ITR-फाइलिंग: 1 महीने से भी कम टाइम बचा है, फिर लगेगा जुर्माना Watch Now :- भोपाल में 92 करोड़ का ड्रग्स जब्त - क्या जिम्मेदार वही !

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