Aplastic anemia: एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित नवविवाहिता को मिली आर्थिक सहायता, ...

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Aplastic anemia: एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित नवविवाहिता को मिली आर्थिक सहायता, सांसद आलोक शर्मा की पहल पर हुआ इलाज संभव

aplastic anemia एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित नवविवाहिता को मिली आर्थिक सहायता सांसद आलोक शर्मा की पहल पर हुआ इलाज संभव

Aplastic anemia: भोपाल की एक नवविवाहिता महिला जो गंभीर बीमारी एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित है, उसे समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा और आर्थिक सहायता प्रदान की गई। यह मदद सांसद आलोक शर्मा की पहल और प्रयासों के चलते संभव हो पाई। इस जानलेवा बीमारी के इलाज का अनुमानित खर्च करीब 8 लाख रुपए था, जो सामान्य परिवार के लिए वहन कर पाना बेहद कठिन था।

[caption id="attachment_105346" align="alignnone" width="300"]Aplastic anemia Aplastic anemia[/caption]

Aplastic anemia: जहां उसका इलाज शुरू किया गया

जैसे ही मामले की जानकारी सांसद आलोक शर्मा को मिली, उन्होंने तत्परता दिखाते हुए महिला के इलाज के लिए केंद्र और राज्य सरकार से आर्थिक सहयोग दिलवाने की प्रक्रिया शुरू की। आलोक शर्मा के प्रयासों के चलते महिला को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज शुरू किया गया।

Aplastic anemia: कुल 6.6 लाख रुपए की राशि की व्यवस्था भी कराई

गौरतलब है कि इस बीमारी से पीड़ित महिला की मदद के लिए एम्स प्रशासन ने भी पहली बार तीन लाख रुपए की राशि सहयोग के रूप में उपलब्ध कराई। यह एम्स द्वारा एक गंभीर रोगी के लिए दी गई उल्लेखनीय सहायता है। इसके अलावा सांसद आलोक शर्मा ने मुख्यमंत्री सहायता निधि और प्रधानमंत्री सहायता निधि से कुल 6.6 लाख रुपए की राशि की व्यवस्था भी कराई।

Aplastic anemia: सांसद प्रतिनिधि सुनील यादव ने भी सक्रिय भूमिका निभाई

इस दौरान एम्स के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गौरव ढींगरा ने भी महिला के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और हर संभव सहयोग किया। इलाज की पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सांसद प्रतिनिधि सुनील यादव ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

रोगी की जान बचा पाना संभव नहीं होता

महिला के परिवारजनों ने इस कठिन समय में सहयोग के लिए सांसद आलोक शर्मा, एम्स प्रबंधन, डॉक्टर गौरव ढींगरा और सांसद प्रतिनिधि सुनील यादव का दिल से आभार जताया है। उनका कहना है कि अगर समय पर यह सहायता न मिलती, तो रोगी की जान बचा पाना संभव नहीं होता।

संवेदनशील नेतृत्व का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है

यह उदाहरण इस बात को दर्शाता है कि जब जनप्रतिनिधि और संस्थाएं आम नागरिक की पीड़ा को समझते हुए संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हैं, तो गंभीर से गंभीर परिस्थिति में भी राहत और समाधान संभव हो सकता है। सांसद आलोक शर्मा का यह प्रयास समाज में संवेदनशील नेतृत्व का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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