Kawardha Collector Viral Video Sparks Political Row: कांग्रेस बोली- ये तालिबानी रवैया है CM साय के सुशासन का
कलेक्टर का सख्त एक्शन बना सियासी मुद्दा
Kawardha Collector Viral Video Sparks Political Row: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में कलेक्टर गोपाल वर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही सियासी घमासान मच गया है। वीडियो में कलेक्टर देर से आने वाले कर्मचारियों को कान पकड़कर सजा देते नजर आ रहे हैं। यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है, जहां कांग्रेस ने इसे ‘तालिबानी मानसिकता’ करार देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर हमला बोला है।
वीडियो वायरल होते ही कांग्रेस का निशाना
कवर्धा कलेक्टर गोपाल वर्मा (Kawardha Collector Gopal Verma) के इस वायरल वीडियो पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ये मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन की असलियत है, जहां अफसर अब तालिबानी सजा देने लगे हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि महिला कर्मचारियों समेत शासकीय कर्मचारियों को शारीरिक दंड देने का अधिकार कलेक्टर को किस कानून ने दिया है?
कर्मचारियों को लगाई फटकार
पूरा मामला गुरुवार सुबह का है, जब कवर्धा कलेक्टर गोपाल वर्मा 10 बजे से पहले ही जिला पंचायत कार्यालय पहुंच गए। लेकिन उन्हें अधिकांश कर्मचारी समय पर मौजूद नहीं मिले। कलेक्टर ने गेट पर ही कुर्सी लगवाई और वहीं बैठकर देर से आने वाले कर्मचारियों का इंतजार करने लगे। जैसे ही कोई कर्मचारी देर से आता, कलेक्टर उसे सबके सामने जमकर फटकार लगाते और कई कर्मचारियों को कान पकड़वाने की सजा भी दी।
42 कर्मचारी चिह्नित, नोटिस जारी
प्रशासन के मुताबिक, देर से पहुंचने वाले कुल 42 कर्मचारियों को चिह्नित किया गया है। इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में समय की पाबंदी और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई है। हालांकि, कलेक्टर के इस कदम पर लोगों की राय बंटी नजर आ रही है।
मानवाधिकार और गरिमा का सवाल
इस घटना ने अफसरशाही के तौर-तरीकों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह मानवाधिकारों का उल्लंघन है और इससे कर्मचारियों की गरिमा को ठेस पहुंची है। विपक्ष का तर्क है कि अगर देरी पर कार्रवाई करनी ही थी तो उसके लिए प्रशासनिक तरीके और नियम हैं, लेकिन शारीरिक दंड देना न सिर्फ गैरकानूनी बल्कि अमानवीय है।
सरकार की तरफ से सफाई का इंतजार
इस मामले पर अब तक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार इस घटना पर स्पष्ट जवाब दे और कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करे। इस विवाद ने कवर्धा प्रशासन के कामकाज के तौर-तरीकों को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।
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