जापान में 1 लाख लोग 100 पार, दुनिया हैरान!

ये कोई चमत्कार नहीं, जीवनशैली का कमाल है
सोचिए ज़रा, आपके आसपास ऐसे लोग हों जो 100 साल की उम्र पार कर चुके हों – और फिर भी खुद खाना बनाते हों, पार्क में सैर करते हों, दूसरों को हंसाते हों। ये कोई फ़िल्मी कहानी नहीं, बल्कि जापान की हकीकत है।
इस साल जापान में 99,763 लोग 100 साल की उम्र पार कर चुके हैं। और इनमें से लगभग 88% महिलाएं हैं। ये आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं, एक संस्कृति, जीवनशैली और सोच का प्रतिबिंब है, जो बाकी दुनिया से बिल्कुल अलग है।
इतनी लंबी उम्र का राज क्या है?
अगर आप सोच रहे हैं कि जापानियों के पास कोई जादुई औषधि है, तो ऐसा नहीं है। इनकी लंबी उम्र का राज है — साधारण लेकिन अनुशासित जीवनशैली, गहराई से जुड़ी परंपराएं, और एक सकारात्मक सोच।
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कम नमक, कम चीनी, लेकिन ज़्यादा जीवन: जापान सरकार ने 1960 के दशक से ही लोगों को हेल्दी खाने के लिए जागरूक किया।
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रोज़ाना की एक्सरसाइज़: 1923 से टीवी पर हर सुबह 3 मिनट का व्यायाम कार्यक्रम चलता है, जिसे आज भी लाखों लोग फॉलो करते हैं।
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सादा लेकिन पौष्टिक भोजन: फर्मेंटेड फूड, सी-वीड, ग्रीन टी और ताज़ी सब्ज़ियाँ इनकी डाइट का हिस्सा हैं।
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सोशल कनेक्शन और उद्देश्य: जापान में बुज़ुर्गों को बोझ नहीं, समाज की पूंजी माना जाता है। वो रोज़ कुछ नया सीखते हैं, बच्चों को सिखाते हैं।
बुज़ुर्ग दिवस: जहां उम्र नहीं, अनुभव को सेलिब्रेट किया जाता है
हर साल 15 सितंबर को जापान “बुज़ुर्गों का दिन” मनाता है। इस बार 52,310 लोगों को प्रधानमंत्री की ओर से चांदी का गिलास और शुभकामना पत्र दिया गया। ये सिर्फ सम्मान नहीं, एक प्यार भरा शुक्रिया है।

सबसे बुज़ुर्ग महिला, शिगेको कागावा, 114 साल की हैं। और सबसे उम्रदराज़ पुरुष हैं कियोताका मिज़ुनो, 111 साल के।
पर हर कहानी के पीछे एक सच्चाई भी होती है…
हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 2010 में करीब 2.3 लाख 100+ उम्र के लोगों की पहचान गड़बड़ पाई गई। कई केसों में बुज़ुर्ग मर चुके थे, लेकिन परिजनों ने पेंशन पाने के लिए रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया।
ये बात सिस्टम की खामियों की ओर इशारा करती है — लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि जापान की बुज़ुर्ग आबादी का सम्मान कम हो जाता है।
क्या हम कुछ सीख सकते हैं?
बिलकुल!
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हेल्दी डाइट
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नियमित व्यायाम
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जीवन में उद्देश्य
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बुज़ुर्गों के साथ संवाद और सम्मान
ये सारी चीज़ें हमें लंबा नहीं, बल्कि बेहतर जीवन जीना सिखा सकती हैं।
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