जानिए क्यों दुनिया भारत की रक्षा डील्स को गंभीरता से देखने लगी है
भारत अब सिर्फ मिसाइल नहीं, आत्मनिर्भरता खरीद रहा है
India Russia S400 Deal India: जब भारत ने 2018 में रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने का ऐलान किया था, तब ये सिर्फ एक डिफेंस डील नहीं थी ये एक बयान था। बयान कि भारत अब किसी भी हमले के लिए “तैयार” है, सिर्फ बातों में नहीं, तकनीक में भी।
और अब, 2025 के आख़िरी महीनों में जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आने वाले हैं, तो ये बात फिर से चर्चा में है कि क्या भारत और S-400 खरीदेगा या अगला कदम S-500 की तरफ होगा?
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India Russia S400 Deal India: S-400 ने क्या बदला?
याद कीजिए 2021 की वो सर्दी जब पाकिस्तान ने सीमा पर ड्रोन भेजे थे। पहली बार, बिना किसी बड़े हंगामे के, इन हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। और इसका श्रेय मिला S-400 सिस्टम को। भारतीय वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा था,
पहली बार ऐसा हुआ कि हम खतरे को आने से पहले पहचान पाए और बिना देर किए उसे रोक भी पाए। S-400 ने हमें सिर्फ जवाब देने की क्षमता नहीं दी, बल्कि मनोबल भी बढ़ाया।
आज पंजाब, सिक्किम और राजस्थान जैसे संवेदनशील इलाकों में S-400 की तैनाती सिर्फ सुरक्षा नहीं, एक राजनीतिक संदेश भी है।
अब S-500 की चर्चा क्यों हो रही है?
S-500 को रूस की “future tech” माना जाता है ये हाइपरसोनिक मिसाइलों, स्टील्थ फाइटर्स और यहां तक कि सैटेलाइट से होने वाले हमलों को भी जवाब देने में सक्षम है। ऐसे में अगर भारत इस सिस्टम की तरफ देख रहा है, तो ये सिर्फ डिफेंस की बात नहीं ये हमारे रणनीतिक आत्मविश्वास की कहानी है। भारत अब सिर्फ अमेरिका और चीन के बीच झूलने वाला देश नहीं रहा। ये अब अपने फैसले खुद लेने वाला राष्ट्र बन चुका है।

क्या रूस पर भरोसा करना सही है?
कुछ लोग सवाल उठाते हैं रूस पर भरोसा क्यों, जब वो खुद युद्ध में उलझा है? लेकिन यही बात भारत की रणनीति को खास बनाती है। जब पश्चिमी देशों ने भारत को “फेंस पर बैठा खिलाड़ी” कहा, भारत ने संतुलन बनाए रखा। आज रूस के साथ डील करना भारत के लिए सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि उस भरोसे का हिस्सा है जो दशकों से बना है।
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