Indian Rupee Weakness 2025: अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में संभावित सुधार और कम टैरिफ दर से दबाव कम हो सकता है, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है, तो आरबीआई को रुपये को और अधिक समर्थन देने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। भारतीय रुपया वर्तमान में 2025 मे एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन चुकी है। यह 2022 के बाद से अपनी सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट की ओर अग्रसर है - वह वर्ष जब रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं, जिससे भारत को बड़ा झटका लगा, जो अपने कच्चे तेल का लगभग 90% आयात करता है।
हालांकि, इस वर्ष की कमजोरी का एक प्रमुख कारण भारतीय निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ तथा स्थानीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का पलायन भी है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुमान अनुसार, रुपए को स्थिर करने के प्रयास में भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई के अंत से अब तक 30 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां बेची हैं, और ऐसा करने से अक्टूबर के मध्य में नई निम्नतम स्तर को टालने में सफलता मिली है।लेकिन आज 3 दिसंबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 90.27 पर आ गया, जिससे पता चलता है कि केंद्रीय बैंक ने अपनी मुद्रा की रक्षा करना बंद कर दिया है। विश्लेषकों को संदेह है कि RBI अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में देरी की स्थिति में अपने भंडार को बचाए रखना चाहता है। मुद्रा अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में संभावित सुधार और कम टैरिफ दर से मुद्रा पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो आरबीआई को रुपये को और सहारा देने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।