एलन मस्क बोले- रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों भ्रष्ट
अमेरिका की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आया है। अरबपति बिजनेसमैन और टेक टाइकून एलन मस्क ने शनिवार को अमेरिका में एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन का ऐलान कर दिया है, जिसका नाम है – ‘अमेरिका पार्टी’.
एलन मस्क ने यह घोषणा अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस (4 जुलाई) के मौके पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर की। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के भ्रष्ट गठजोड़ से मुक्ति दिलाने का समय आ गया है।

मस्क बोले- टू पार्टी सिस्टम बर्बादी की जड़
मस्क ने अपने पोस्ट में लिखा,
“आज अमेरिका पार्टी का गठन किया जा रहा है, ताकि आपको आपकी आज़ादी वापस मिल सके। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट एक ही सिक्के के दो पहलू हैं – दोनों ही भ्रष्ट हैं।”
मस्क ने यह घोषणा एक पोल के नतीजों के आधार पर की, जो उन्होंने X पर कराया था। इस पोल में उन्होंने पूछा कि क्या अमेरिका को टू-पार्टी सिस्टम से छुटकारा मिलना चाहिए और क्या एक नई पार्टी की ज़रूरत है?
इस पोल में करीब 65.4% यूजर्स ने “हां” में जवाब दिया, जबकि 34.6% लोगों ने “नहीं” कहा। मस्क ने लिखा, “अब जब बहुमत चाहता है तो हमें इसे हकीकत बनाना होगा।”
टू-पार्टी सिस्टम क्या है और क्यों बना हुआ है असरदार?
अमेरिका की राजनीति बीते 150 सालों से सिर्फ दो दलों – डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन – के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ये दोनों पार्टियां ही राष्ट्रपति, कांग्रेस और राज्य स्तरीय चुनावों में वर्चस्व बनाए हुए हैं।
- डेमोक्रेटिक पार्टी: 1828 में बनी, गरीबों और मजदूर वर्ग के हक की बात करने वाली पार्टी रही है।
- रिपब्लिकन पार्टी: 1854 में गुलामी विरोध के उद्देश्य से बनी, अब यह बिजनेस समर्थक, टैक्स-कट नीति की पक्षधर है।
इन दोनों पार्टियों की मजबूत पकड़ का एक बड़ा कारण है अमेरिका का चुनावी सिस्टम, जो “फर्स्ट पास्ट द पोस्ट” यानी सबसे ज्यादा वोट पाने वाले को सीधे विजेता मानता है। इससे तीसरी पार्टियों के लिए मौके बेहद सीमित हो जाते हैं।

तीसरी पार्टी क्यों नहीं हो पाई सफल?
अमेरिका में समय-समय पर कई तीसरी पार्टियों की कोशिशें हुईं, लेकिन किसी को स्थायी सफलता नहीं मिली:
- 1912 में थियोडोर रूजवेल्ट ने Bull Moose Party बनाई, पर वह सिर्फ एक चुनाव ही लड़ सके।
- 1992 में रॉस पेरोट को 19% पॉपुलर वोट मिला, लेकिन कोई इलेक्टोरल वोट नहीं।
- लिबर्टेरियन और ग्रीन पार्टी जैसी पार्टियां आज भी 3-4% वोट तक सिमटी हुई हैं।
इन पार्टियों को न फंडिंग मिलती है, न मीडिया में जगह, और न ही मजबूत जमीनी संगठन। वोटर भी इन्हें वोट काटने वाली पार्टी मानते हैं।
क्या मस्क की पार्टी बदलाव ला सकती है?
एलन मस्क की पहचान सिर्फ बिजनेस टायकून की नहीं रही। वह कई बार अपने विचारों और विवादित ट्वीट्स से राजनीति में गहरी दिलचस्पी दिखा चुके हैं। अब जब उन्होंने खुद एक राजनीतिक दल शुरू करने की घोषणा की है, तो इससे अमेरिका की पारंपरिक राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।
उनकी ताकतें:
- X जैसे पॉपुलर प्लेटफॉर्म का कंट्रोल
- टेक इंडस्ट्री और यंग जनरेशन में भारी फॉलोइंग
- मीडिया अटेंशन और ग्लोबल इन्फ्लुएंस
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। चुनावी प्रणाली, संसाधनों की जरूरत, और राजनीतिक नेटवर्क की कमी एक बड़ी दीवार हो सकती है।
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