छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) का खतरा बढ़ता जा रहा है। कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में संक्रमण की पुष्टि के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 22,808 पक्षियों और 25,896 अंडों को नष्ट कर दिया है।
17 मार्च से शुरू हुआ मौत का सिलसिला
जानकारी के अनुसार, पोल्ट्री फार्म में 16-17 मार्च के आसपास ही मुर्गे-मुर्गियों की मौत शुरू हो गई थी। शुरुआत में करीब 100 पक्षियों की मौत को सामान्य मानकर नजरअंदाज किया गया। इस दौरान पूरे संभाग में मुर्गे और चूजों की सप्लाई भी जारी रही, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया। लगातार मौतें बढ़ने के बाद करीब 6 दिन बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए। रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासन हरकत में आया और बड़े पैमाने पर कुक्कुटों को नष्ट करने की कार्रवाई शुरू की गई।
सक्रमण रोकने उठाए सख्त कदम
संक्रमण को रोकने के लिए 5,000 से अधिक मुर्गियां, 5,000 बटेर, 600 बतख, 17,000 चूजे, 25,000 से अधिक अंडे नष्ट किए गए। इसके अलावा करीब 79 क्विंटल दाना और हैचरी की दवाइयों सहित लाखों रुपये की सामग्री भी खत्म की गई।
खुले में फेंके गए मरे पक्षी, बढ़ा खतरा
शहर के खमतराई क्षेत्र में मरे हुए मुर्गों को खुले में फेंके जाने की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने सुरक्षित निस्तारण का दावा किया था, लेकिन कई जगहों पर पक्षियों को नालियों में फेंक दिया गया, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।
घर-घर सर्वे और स्वास्थ्य जांच
स्वास्थ्य विभाग की 14 टीमों ने देवनंदन नगर क्षेत्र में डोर-टू-डोर सर्वे किया। 156 घरों के 636 लोगों की जांच में 9 लोगों में सर्दी-खांसी और बुखार के लक्षण पाए गए हैं। फिलहाल सभी पर निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासन का दावा- स्थिति नियंत्रण में
पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि स्टाफ की कमी के कारण निगरानी में चुनौतियां सामने आ रही हैं।इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी पक्षी की असामान्य मौत की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और सतर्कता बरतें।
